
भारत का मुंद्रा बंदरगाह
नई दिल्ली. यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच भारत का मुंद्रा बंदरगाह लाल सागर के व्यापारिक मार्ग का विकल्प बनकर उभरा है, जहां पिछले सितंबर से विद्रोही व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इजरायल ने हाल ही इसे नए मार्ग के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इजरायल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए मुंद्रा को नए मार्ग के रूप विकसित करने की बात कही है। इस मार्ग से माल मुंद्रा से संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाहों, जैसे दुबई के जेबेल अली बंदरगाह, तक समुद्र के रास्ते जाएगा और जमीनी रास्ते के जरिए सऊदी अरब और जॉर्डन से होते हुए इजरायल तक जाएगा। खास बात ये है कि 'इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर' (आइएमईसी) भी इसी तरह का प्रोजेक्ट है, जो भारत को मध्य-पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ेगा। हालांकि गाजा संघर्ष के चलते अभी इस रूट का अंतिम स्वरूप तय नहीं हो पाया है। मुंद्रा का प्रोजेक्ट धरातल पर उतरा तो भारत विश्व व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा, जिससे मध्य-पूर्व और यूरोप तक व्यापार का नया मार्ग खुलेगा।
अभी घूमकर जा रहे हैं जहाज
लाल सागर, स्वेज नहर के माध्यम से हिंद महासागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। वैश्विक व्यापार का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा लाल सागर होते हुए गुजरता है। हूती विद्रोहियों से बचने के लिए अभी जहाजों को दक्षिण अफ्रीका के कैप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे न केवल ज्यादा समय लग रहा है, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी कई गुना बढ़ गई है। रेगेव ने बताया, मुंद्रा मार्ग से माल ढुलाई में 12 दिन का समय बचेगा और लागत भी कम आएगी।
नया नहीं है विचार
मुंद्रा पोर्ट का विचार अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले कुछ समय से इस पर काम चल रहा था। अरबी समाचार पत्र अल-अरबी अल-जदीद ने आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ नेहाद इस्माइल के हवाले से कहा है कि भूमि गलियारा पहली बार अब्राहम समझौते के समय प्रस्तावित किया गया था, जो इजरायल और कुछ अरब राज्यों के बीच 2020 में हुआ था।
भारत पर असर
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत ने अपने 18 लाख करोड़ रुपए के सामान निर्यात का लगभग 50% लाल सागर के माध्यम से किया, जबकि 17 लाख करोड़ रुपए के आयात का लगभग 30% इसी मार्ग से हुआ। बासमती निर्यात का 35% लाल सागर मार्ग के जरिए यूरोप, पश्चिम एशिया, उत्तरी अमरीका और अफ्रीका भेजा जाता है। हालांकि माल ढुलाई की लागत बढऩे से बड़ी मात्रा में चावल घरेलू बाजार में बेचा जा रहा है।
Updated on:
24 Feb 2024 07:05 am
Published on:
24 Feb 2024 12:19 am
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