US Presidential Elections 2020: अमरीकी खुफिया प्रमुख ने जताई चिंता, विदेशी देश मतदान पर डाल सकते हैं असर

Highlights

  • अमरीका (America) के शीर्ष खुफिया प्रमुख ने ये चेतावनी दी है, उनका कहना है कि ये देश उम्मीदवारी के अनुसार प्रभाव डाल सकते हैं।
  • अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पहले ही इस बार होने वाले चुनाव को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

वाशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Elections) में अब कुछ माह ही शेष हैं। मगर इससे पहले कई रिपोर्ट ऐसी आ रही हैं,जिसमें कहा जा रहा है कि विदेशी ताकतें इसे प्रभावित कर सकती हैं। एक शीर्ष अमरीकी खुफिया प्रमुख का कहना है कि चीन (China) , रूस (Russia) और ईरान (Iran) इस साल होने वाले चुनाव को प्रभावित करने वाले देशों में शामिल हैं। अमरीकी प्रतिवाद के निदेशक द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि ये देश वोट को प्रभावित करने वाले उपायों का उपयोग कर रहे हैं। इन देशों में चुनाव जीतने वाले को लेकर एक प्राथमिकता बनी हुई है।

इससे पहले आरोप लगते रहे हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अभियान में मदद करने के लिए रूस ने 2016 के चुनाव में हस्तक्षेप किया था। जिसे रूस खारिज करता आया है। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि उन्होंने चुनाव हस्तक्षेप को रोकने को लेकर अब तक कोई योजना बनाई, तो उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन इसे "बहुत बारीकी से" देख रहा है।

मेल-इन या पोस्टल बैलट के खतरों के बारे में ट्रंप अपने दावों को पहले ही सामने ला चुके हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि इस तरह के वोट को "इतिहास में सबसे गलत और धोखाधड़ी वाले चुनाव" माना जा सकता है, जिससे उनकी अपनी पार्टी के सदस्यों के बीच भी बैकलैश हो सकता है।

डेमोक्रेटिक सांसदों की भी शिकायत है कि अमरीकी खुफिया एजेंसियां इस साल के मतदान में विदेशी हस्तक्षेप के बारे में जनता को जानकारी जारी नहीं कर रही हैं। इस चुनाव में जहां रिपब्लिकन उम्मीदवार राष्ट्रपति ट्रंप दूसरी बार जीतने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और पूर्व उपाध्यक्ष जो बिडेन उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

क्या है आशंका

नेशनल काउंटर इंटेलीजेंस एंड सिक्योरिटी सेंटर (NCSC) के प्रमुख विलियम इवानिना ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि विदेशी देश मतदाताओं की प्राथमिकताओं को बदलने, अमरीकी नीतियों को बदलने, देश में कलह बढ़ाने और अमरीकी लोगों के विश्वास को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।"

उन्होंने बताया है कि कई देशों में चुनाव जीतने वाले के लिए एक प्राथमिकता है। प्रतिवाद निदेशक ने कहा कि वे चीन, रूस और ईरान के बारे में मुख्य रूप से चिंतित हैं। चीन चाहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप दोबारा चुनाव न जीतें, जिन्हें बीजिंग अप्रत्याशित देखता है। रूस बिडेन की उम्मीदवारी को पंसद नहीं करता है। वह उन्हें रूस विरोधी मानता है। रूस उन्हेें बदनाम करना चाहता है। इवानिना ने कहा कि रूस से जुड़े कुछ अन्य कलाकार भी सोशल मीडिया और रूसी टीवी पर राष्ट्रपति ट्रंप की उम्मीदवारी को बढ़ावा देना चाहते हैं"।

वहीं ईरान "अमरीकी लोकतांत्रिक संस्थानों", ट्रंप को "कम" करने का प्रयास कर रहा है, और "देश को विभाजित" कर रहा है। इससे मतों का विघटन होगा। वह "अमरीका विरोधी सामग्री" को ऑनलाइन फैलाने की कोशिश में जुटा हुआ है। ट्रंप के कार्यकाल में अमरीका और ईरान में सबसे अधिक तल्खी देखी गई है। ईरान नहीं चाहता है कि ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति का पद संभालें। वह उनकी हार को लेकर मुहिम चला रहा है।

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