
हनुमान जी को दलित कहने पर बढ़ सकती हैं सीएम योगी की मुश्किलें, यूपी के इस शहर में परिवाद दर्ज
मुरादाबाद: सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा बीते दिनों राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में हिन्दू धर्म के प्रमुख भगवान हनुमान को दलित वर्ग का बताने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वहीँ अब ये मामला कोर्ट में भी चला गया है। स्थानीय अधिवक्ता त्रिलोक चन्द्र दिवाकर ने गुरूवार को सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला बताया। जिस पर कोर्ट ने वाद स्वीकार करते हुए दस दिसम्बर को सुनवाई की बात कही है।
इस तारीख को होगी सुनवाई
अधिवक्ता त्रिलोक चन्द्र दिवाकर द्वारा गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज जायसवाल की कोर्ट ने परिवाद प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तिथि निर्धारित की है। इस तिथि पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट अपना निर्णय देगी। परिवाद के प्रार्थना पत्र में वकील ने खुद को इंटरनेशनल हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड की परामर्शदात्री समिति का अध्यक्ष बताया है।
भावनाएं आहत करने का आरोप
परिवाद में कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान निंदनीय है। उनके इस बयान से हिंदू समाज के साथ ही मेरी भावनाओं को ठेस पहुंची है। हनुमान जी के लिए दलित शब्द उच्चारित करना धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। ऐसे में मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान अलवर में अपने भाषण में हनुमान जी के लिए दलित शब्द प्रयोग करते हुए जनसभा को संबोधित किया था।
चर्चा का विषय बना है बयान
यहां बता दें कि सीएम योगी द्वारा हनुमान जी को दलित बताने का मामला राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चाओं में हैं। यही नहीं धर्म को मानने वाले भी इस मामले पर बहस कर कर रहे हैं। हालांकि इस बयान के बाद पर अभी तक भाजपा अथवा योगी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है।
Published on:
30 Nov 2018 09:34 am
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