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पत्रिका विशेष: अमरोहा के “आम” नहीं बन पाए खास, कोरोना के चलते 70 फीसदी से अधिक विदेशी निर्यात आर्डर कैंसिल

Highlights -कोरोना के बाद आंधी-बारिश से हो चुका बड़ा नुकसान -आम की पैदावार करने वाले किसान बेहद परेशान -हर वर्ष अमरोहा से 70 से 80 प्रतिशत तक आम का निर्यात होता था विदेशों को

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अमरोहा: आम और रेहू के नाम पर अमरोहा का नाम है ये हर कोई जानता है। लेकिन कोरोना ने इस जिले की पहचान यानि आम के किसानों के लिए खासा संकट पैदा कर दिया है। क्यूंकि जनपद में आम की बड़ी पैदावार होती है और देश के साथ विदेशों से भी दिसम्बर और जनवरी में आर्डर मिल जाते हैं। कोरोना के चलते 70 से 80 फीसदी कारोबार बेकार हो गया है। स्थानीय किसान अब फसल को देखकर सहमे हैं।

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किसानों को हुआ बड़ा नुकसान
आम के बाग मालिकों का कहना हैं की हर वर्ष जहां अमरोहा जनपद से 70 से 80 प्रतिशत आम का निर्यात स्वदेशी व्यापारियों के द्वारा विदेशो को किया जाता था। लेकिन इस बार आम के इस बड़े निर्यात पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। आम की पैदावार तो अच्छी हो रही है, लेकिन आम की देख रेख के लिए मजदूर नही मिल पा रहे हैं और यदि कुछ आम की पैदावार हो रही है तो उसको भारी बारिश और आंधी नष्ट कर दे रही है। जिससे इस बार आम की पैदावार करने वाला किसान और व्यापारी डरा सहमा बैठा हैं।

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70 से 80 फीसदी ऑर्डर कैंसिल
स्थानीय बाग मालिक मोहम्मद शमीम कहते हैं कि जनपद में बड़ी संख्या में आम की खेती से हजारों परिवारों का गुजारा होता था, लेकिन इस बार कोरोना और लॉक डाउन के कारण आर्डर नहीं मिले। आम की रखवाली के लिए मजदूर भी नहीं मिल पा रहे हैं। सरकार ने कुछ राहत दी है, लेकिन उतनी बड़ी मात्रा में नहीं जो सामान्य स्थितियों में रहती थी। लिहाजा नुकसान बड़ा होना इस बार तय है। 70 से 80 प्रतिशत निर्यात विदेशों में होता था। वो भी नहीं मिल पाया है, स्थानीय मंडियों में यहां के अलावा और जगह का भी आम आना शुरू हो गया है। इसलिए खपत होना थोडा मुश्किल है।

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और भी जगह नुकसान
यही हालत रामपुर और अन्य जनपदों में भी हैं, सरकार ने किसानों को शारीरिक दूरी के साथ खेती के काम की इजाजत दी है। लेकिन अभी लॉक डाउन के चलते न मजदूर और न वाहन मिल पा रहे हैं। इसलिए किसानों के लिए मुश्किल बढ़ रही है। यही नहीं प्राकृतिक आपदा से भी फसलों को बड़ा नुकसान हो रहा है।

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