
मुरादाबाद का हस्तशिल्प निर्यात 30% धड़ाम | फोटो : ANI
Export Crisis US Tariff Moradabad: अमेरिकी टैरिफ और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यात को गहरे संकट में डाल दिया है। वर्ष 2025 में जिले का निर्यात कारोबार करीब 30 प्रतिशत घट गया। आंकड़ों के अनुसार, मुरादाबाद से होने वाला औसतन 10,437 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात सिमटकर साढ़े छह से सात हजार करोड़ रुपये के बीच रह गया। यानी एक ही साल में लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान दर्ज किया गया।
मुरादाबाद हैंडीक्रॉफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) के अध्यक्ष नावेद उर्रहमान के मुताबिक अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के बाद हालात तेजी से बदले। अमेरिका के खरीदारों ने पहले से दिए गए ऑर्डर होल्ड कर दिए और नए ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गया। चूंकि मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यात का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को जाता है, इसलिए अमेरिकी बाजार में आई हलचल का सीधा असर जिले के कारोबार पर पड़ा।
निर्यातकों को जनवरी के मध्य अमेरिका में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय फेयर से कुछ उम्मीदें हैं। कारोबारियों का मानना है कि वहां खरीदारों का रुख भविष्य के ऑर्डर की दिशा तय करेगा। हालांकि यदि टैरिफ दरें और कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में भी निर्यात में बड़े सुधार की संभावना कम नजर आ रही है।
पीतल बस्ती दस्तकार एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी साजिद मंसूरी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में करीब डेढ़ लाख कारीगर हस्तशिल्प से जुड़ा काम छोड़ चुके हैं। सिर्फ एक साल में निर्यात से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों से लगभग 60 हजार लोगों की नौकरियां चली गईं। कई निर्यातकों ने स्थायी कामगारों को हटाकर दैनिक मजदूरी पर काम करवाना शुरू कर दिया है, जिससे कारीगरों की आय और सुरक्षा दोनों प्रभावित हुई हैं।
मुरादाबाद से हस्तशिल्प उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब, दुबई सहित करीब 20 देशों में निर्यात किए जाते हैं। इनमें अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है। इसी वजह से अमेरिकी बाजार में थोड़ी सी गिरावट भी मुरादाबाद के उद्योग पर बड़े संकट का रूप ले लेती है।
जिला उद्योग केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में करीब नौ हजार लोगों का निर्यात-आयात के लिए पंजीकरण है, जबकि दो हजार लोग केवल निर्यात से जुड़े हैं। हर साल लगभग 1200 लोग नियमित रूप से निर्यात करते हैं और करीब 800 लोग कभी-कभार ही अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच पाते हैं। मौजूदा हालात में इन छोटे निर्यातकों पर संकट सबसे ज्यादा गहराया है।
निर्यातक अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए दूसरे देशों में नए खरीदार खोजने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अभी तक वैकल्पिक बाजारों से कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। उद्योग जगत का कहना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता नहीं आई तो वर्ष 2026 में निर्यात में और गिरावट आ सकती है।
आईआईए हैंडीक्रॉफ्ट डेवलपमेंट कमेटी के चेयरमैन सुरेश कुमार गुप्ता का कहना है कि अमेरिका में हल्की सी आर्थिक या नीतिगत हलचल भी मुरादाबाद के कारोबार को प्रभावित कर देती है। वहीं, द हैंडीक्रॉफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल के अनुसार 2025 में बड़े ऑर्डर या तो कैंसिल हुए या होल्ड पर चले गए। निर्यातक दीपक चौधरी ने आशंका जताई है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो 2026 और ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
Published on:
03 Jan 2026 02:50 pm
बड़ी खबरें
View Allमुरादाबाद
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
