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बड़ी खबर:अमरोहा में एक हफ्ते में रहस्यमय तरीके से मर गए सौ से अधिक बंदर

बीते एक सप्ताह में सौ से अधिक बंदरों की मौत से स्थानीय लोगों के साथ ही वन विभाग में हडकंप मचा हुआ है।

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moradabad

अमरोहा: जनपद में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां बीते एक सप्ताह में सौ से अधिक बंदरों की मौत से स्थानीय लोगों के साथ ही वन विभाग में हडकंप मचा हुआ है। शुरूआती जांच में बंदरों की मौत किसी जहर से होने की बात की जा रही है। लेकिन हैरानी इस बात की है कि वन विभाग को ग्रामीणों ने सूचना भी दी लेकिन कोई सुध नहीं ली। जिस कारण बंदरों का मरना लगातार जारी है। हरकत में आये प्रशासन ने मरने वाले बंदरों का पोस्टमार्टम कराने के लिए आई वी आर आई बरेली भेजा है। जिसमें पता चल सकता है कि एकाएक इतनी बड़ी संख्या में बंदरों की मौत जहर से हुई या किसी बीमारी से। वहीँ इस तरह से बंदरों के मरने से ग्रामीणों में भी काफी आक्रोश है।

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गांव में लगातार बंदरों की मौत का सिलसिला जारी है।मंगलवार को भी ढबारसी के मोहल्ला होली वाला की गलियों में सात बंदर मरे मिले। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सात आठ दिनों से लगातार बंदर मर रहे हैं। बंदरों की मौत की वजह का पता नही चल पा रहा है, बंदर खूनी दस्त के बाद तड़प तड़प कर दम तोड़ देते हैं। रोजाना दस से बारह बंदर मर जाते हैं। बंदरों की मौत से लोग हैरान हैं। वहीं उन्हें जहर देकर मारने की आशंका भी जताई जा रही है। चूंकि इस जानवर को धर्म विशेष से भी जोड़ा जाता है। इसलिए ग्रामीणों में ख़ासा आक्रोश फ़ैल रहा है।

ग्रामीणों ने जहर देकर मारने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। इसके साथ ही लोगों में दहशत भी बनी हुई हैं। ग्रामीण मान रहे हैं कि अगर बंदरों की मौत बीमारी से हो रही है तो कहीं यह ‌बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ना ले ले। प्रधान पति राजीव गोयल ने बताया कि गांव में अब तक करीब सौ बंदरो की मौत हो चुकी है। उन्होंने प्रशासन से बंदरों की मौत की जांच कराने की मांग उठाई है। अगर किसी ने जहर दिया है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।

पोस्टमार्टम करने वाले डा. तेजपाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम में यह बात को साबित हुई है कि बंदर का पेट खाली था। यानि मरने से दो तीन दिन पहले से बंदर ने कुछ खाया नहीं था। बंदर के फेफड़े और लीवर भी खराब मिला है। खूनी दस्त से बंदरों की मौत हो रही है। जहर देने की पुष्टि लैब में जांच के बाद ही हो सकेगी। गांव में उनके सामने दो बंदरो की मौत हुई। जबकि दो बेहोशी की हालत में पड़े थे।

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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ब्रजवीर सिंह ने बताया कि यहा बंदरों की काफी तादात है। सारे बंदर पहले अंधेरी बाग में रहते थे बाग कटने के बाद बंदर आबादी में आ गए। बंदरों के उत्पात से लोग परेशान रहते है। लेकिन बंदरों की मौत से ग्रामीण सकते में है। बंदरों की मौत पर टीम गठित की गयी है। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद बंदरो का बिसरा आरवीआई बरेली भेजा गया है। जिससे बंदरों की मौत का सच सामने आ सके। वहीं जो बंदर बीमार है उनका इलाज किया जा रहा है।

उधर बंदरो की मौत से वन विभाग पूरी तरह से अनजान बना हुआ है। डीएफओ रमेशचंद से बात नही हो पायी उनका नंबर बंद है। एसडीओ एके सिंह ने कहा कि उन्हें बंदरों की मौत के बारे में जानकारी नही है। वन रेंजर को जानकारी कर कार्रवाई करेंगे। जहा एक तरफ बेजुबान जानवर बे मौत मर रहे है वही कि वन और वन्य जीवों की सुरक्षा की बात करने वाले आलाधिकारी को घटना की जनकारी ही नही है। सैकड़ों बंदर मरने के बाद भी वन विभाग की नींद से नही जागा है।

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