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डॉक्टर ने खोला महिलाओं की चोटी काटने वालों का ये राज़

वरिष्ठ मनोचिकित्सक बोले कोई चोटी काटने वाली चुड़ैल नहीं बल्कि...

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Rajkumar Pal

Aug 04, 2017

psychiatrist Dr. Neeraj Gupta

मुरादाबाद। पिछले सप्ताह भर से अधिक समय से देश के अलग-अलग इलाकों में महिलाओं की चोटी काटने वाली खबर तेजी से फैल रही हैं। जिसकी दस्तक राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा होते हुए मुरादाबाद मंडल में अमरोहा तक पहुंच गयी। यहां भी एक महिला ने अपनी चोटी कट जाने की बात कही। जिसके बाद इस इलाके की महिलाएं भी दहशत में आ गयीं हैं। दावा किया जा रहा है कि चोटी काटने वाली कोई चुड़ैल है क्योंकि जिसकी चोटी कटती है उस समय सर में दर्द हो जाता है। अब यहां सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई चोटी काटने वाली कोई चुड़ैल होती है या ये सिर्फ अफवाह है या फिर कुछ और?

यही जानने की कोशिश शुक्रवार को पत्रिका टीम ने शहर के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. नीरज गुप्ता से की। उन्होंने जो बताया वो वाकई चौंकाने वाला है। डॉ. नीरज गुप्ता के मुताबिक ये एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। जिसे मेडिकल साइंस में मॉस हिस्टीरिया कहते हैं। क्योंकि इसके अंदर कुछ लोग खुद की गई घटनाओं को दूसरे द्वारा की गयीं बताते हैं। जिसके बाद इस तरह की स्थिति उत्पन्न होती है। उनके मुताबिक ये कोई पहली घटना नहीं है।







डॉ. नीरज ने बताया कि अगर हम सभी घटनाओं को देखें तो इनमें ज्यादातर उम्र 15 साल से 45 साल के बीच की महिलाओं का है। वहीं इनकी शैक्षिक और सामाजिक पृष्ठभूमि निम्न, मध्यमवर्गीय या उससे नीचे है। लिहाजा वे इसकी जद में ज्यादा रहती हैं। उन्होंने बताया कि विकाशसील देशों में इससे पहले भी कई और घटनाएं हो चुकी हैं। वे बताते हैं कि हमारे दिमाग में तीन तरह से काम करते हैं। लिहाजा ये उस वक्त की गयी घटना हमें याद नहीं रहती। उनके मुताबिक ये हरकत तब होती है जब व्यक्ति किसी से अपनी बात कह नहीं पाता वो अवसाद में घिर जाता है और दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भी इस तरह की घटना कर देता है।

लिहाजा चोटी या बाल काटने वाले चुड़ैल या फिर कोई भूत प्रेत नहीं होता है। डॉ. नीरज कहते हैं कि इसे बेहतर मेडिकल कांउसिंल करके सही किया जा सकता है और लोग बिना वजह अफवाह की बजाय उन्हें सच बताएं जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले पर सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर कैम्प लगाकर लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।

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