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आठ दशकों से चली आ रही मुरादाबादी रामलीला मंचन शैली देख लोग हो जाते हैं भाव विभोर, देखिये विडियो

Highlights -आठ दशकों से चली आ रही है शैली -कलाकारों की है देशभर में डिमांड -कई प्रधानमंत्री भी कलाकारों को कर चुके सम्मानित

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मुरादाबाद: देश में अब त्यौहारों की धूम शुरू होने वाली है। इसमें दहशरा महापर्व है। देश भर में इस दिन रावण का पुतला फूंका जाता है। वहीँ दशहरे से पहले लगभग सभी जगह रामलीला का मंचन होता है। जिसमें कलाकार रामायण के पात्रों का मंचन करके रामलीला को जीवंत करते हैं। इन्हीं में से मुरादाबाद के कलाकारों द्वारा अनूठा मंचन किया जाता है। मुरादाबाद की जो शैली है वो सबसे अनूठी है। इसलिए देश भर से यहां के कलाकारों की डिमांड रहती है।

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आठ दशकों से चल रही
रामलीला मंचन की मुरादाबादी शैली पिछले 8 दशकों से अनूठे अंदाज में इस कार्यक्रम को कर रही है। रामलीला मंचन में पहली बार 50 के दशक में मुरादाबाद के कलाकारों द्वारा फिल्म तर्ज पर बैकग्राउंड डायलिंग की शुरुआत की गई।और महिला पात्रों के केदार महिला कलाकारों द्वारा ही अभिनीत करने शुरू किए गए बदले अंदाज के चलते रामलीला मंचन की यह शैली दर्शकों को खूब पसंद आई तो पूरे देश में मुरादाबाद के कलाकारों को बुलाया जाने लगा आज भी कलाकारों की 30 से ज्यादा टीमें देश के विभिन्न राज्यों में रामलीला मंचन की तैयारी में जुटी। प्रदीप शर्मा के मुताबिक आज भी मुरादाबाद शैली का कोई जोड़ नहीं है।

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कलाकारों को मिलता है काम
बनवास के लिए जाते प्रभु राम और उन्हें नदी पार करने वाले केवट के बीच हो रहा यह संवाद अपने अक्सर रामलीला के मंचन पर देखा और सुना होगा। लेकिन जिंदगी के 40 साल रामलीला के मंच पर इस संवाद को जीवित करने वाले शरद के लिए हर बार के कलाकार शरद कई टीवी धारावाहिक को में किए गए अपने अभिनय के दम पर काम कर चुके हैं। कलाकारों के लिए रामलीला मंचन जहां एक और अभिनय की बारीकियां सिखाने का मंच है। वहीं दूसरी ओर भविष्य को दिशा देने वाला एक रास्ता भी है।

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कई लोग सराह चुके
मुरादाबाद से निकली इस खास शैली की रामलीला को देश के कई पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में सराहा चुके हैं। नहीं-नहीं बॉलीवुड की फिल्मों में भी रामलीला कलाकार अपना हुनर समय-समय पर दिखाते रहते हैं। मुरादाबाद के रंगकर्मी बलवीर पाठक के प्रयासों से शुरू हुई है। स्वप्निल शुरुआत अब पूरी तरह फल फूल चुकी है और कलाकारों को भी इस ऐतिहासिक रामलीला का हिस्सा बनने का बनने पर गर्व है।