ट्रांसपोर्टर हड़ताल: यहां फलों और सब्जियों के दाम तीन गुना तक बढे, मंडी में पसरा सन्नाटा

मंडियों में सब्जियों और फलों की कमी के चलते दाम आसमां छू रहें है। जिस कारण ग्राहकों को तीन गुने ज्यादा कीमत में सब्जियां खरीदनी पड़ रही है।

By: jai prakash

Published: 24 Jul 2018, 08:06 PM IST

मुरादाबाद: बीते चार दिनों से जारी ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर अब आम जन जीवन पर दिखने लगा है। मंडियों में सब्जियों और फलों की कमी के चलते इनके दाम आसमां छू रहें है। जिस कारण आम ग्राहकों को दुगुने से तीन गुने ज्यादा कीमत में सब्जियां खरीदनी पड़ रही है। महंगाई की मार झेल रहें आम ग्राहक जेब पर पड़ रहें बोझ से खासे परेशान है। तो वहीं मंडियों में कीमत ज्यादा होने के चलते पहले से रखी सब्जियां और फल सड़ कर बर्बाद हो रहें है। जिससे मंडी के आढ़ती परेशान हैं।

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सब्जी फलों के दाम हुए दोगुने तीन गुने

शहर के बुद्धि विहार मोहल्लें में रहने वाली सुनीता अपने पति के साथ सब्जियां और फल खरीदने मंडी में आई है। सुनीता को उम्मीद थी कि बाजार के मुकाबले सब्जी मंडी में उसे कम कीमत चुकानी पड़ेगी और उसके परिवार पर महंगाई की जो मार पड़ रही है, उसमें कुछ राहत मिलेगी। लेकिन ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण सुनीता को यहां भी निराश होना पड़ा। सुनीता का कहना है की दुकानदार सब्जियों को सोने की कीमत पर बेच रहे है और कल तक जो सब्जियां बाजार में बीस से तीस रुपये किलो के हिसाब से मिलती थी आज उसके लिए दो सौ रुपये किलो तक कि कोमत चुकानी पड़ रही है।

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दुकानदार वसूल रहे मनमाफिक कीमत

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के चलते महंगाई की मार झेल रही सुनीता का दर्द अकेले का दर्द नहीं है। बाजार में पिछले तीन दिनों से हड़ताल के चलते मंडियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय मंडी में आने वाली सब्जियां आम मांग के मुताबिक कहीं कम है जिसके चलते बाजार में दुकानदार मनमाफिक कीमत वसूल रहें है। मंडियों में रखी ज्यादातर सब्जियां पहले से रखी हुई है और अब कीमत ज्यादा होने के चलते इनकी बिक्री नहीं होने के बाद यह सड़ कर बर्बाद हो रही है। सब्जी खरीदने आये राकेश भी कहते है कि दुकानों में जो सब्जी बिक रही है वो काफी महंगी है। लेकिन मंडियों में जो सस्ती कीमतों पर सब्जियां मिलती थी इस वक्त वो काफी सड़ी हालत में है। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के चलते स्थानीय स्तर पर किसानों द्वारा बेचा गया टमाटर,आलू और अन्य सब्जियां दूसरी मंडियों तक नहीं पहुंच रही है।

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आढ़तियों की टूटी कमर

मझोला स्थित मंडी में आढ़ती का काम करने वाले दिनेश पाल के मुताबिक हड़ताल ने आढ़तियों की कमर तोड़ कर रख दी है। नई सब्जियां और फल गाड़ियों की हड़ताल के चलते एक जगह से दूसरी जगह तक नहीं पहुंच पा रहा है लिहाजा सब्जियां मंडियों में ही सड़ रही है। दिनेश पाल बताते है कि पिछले तीन दिन में अकेले आलू से ही उनको पचास हजार रुपये से ज्यादा का नुकशान हो चुका है। आलू की छटनी तीन से चार बार तक करके उसको बाजार में बेचने के लिए तैयार किया जा रहा है। छटनी के काम में हर दिन लेबर चार्ज से आढ़तियों का हजारों रुपए खर्च हो रहा है।

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मंडियों में पसरा सन्नाटा

मंडियों में पसरे सन्नाटे के बीच ग्राहकों के लिए मुसीबत हर रोज बढ़ती जा रही है। सब्जियों और फलों की आवक घटने से हर रोज कीमत में हो रही बढोत्तरी का नुकसांन ग्राहक झेल रहे है। जानकारों के मुताबिक हड़ताल अगर ज्यादा दिनों तक जारी रहती है तो ग्राहकों को जरूरी सामानों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

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