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121 करोड़ में तैयार हुआ 1150 मीटर लंबा पुल, 145 किमी कम हो जाएगी जयपुर राजस्थान की दूरी

चंबल नदी पर 121 करोड़ रुपए की लागत से करीब 1150 मीटर लंबा पुल बनकर तैयार हो गया है, इसके शुरू होते ही मध्यप्रदेश से जयपुर राजस्थान की दूरी 145 किलोमीटर कम हो जाएगी.

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मुरैना. चंबल नदी पर 121 करोड़ रुपए की लागत से करीब 1150 मीटर लंबा पुल बनकर तैयार हो गया है, इसके शुरू होते ही मध्यप्रदेश से जयपुर राजस्थान की दूरी 145 किलोमीटर कम हो जाएगी, संभावना है कि ये पुल अगले माह फरवरी में शुरू हो जाएगा, इस पुल के शुरू होने से जहां एक और एमपी से राजस्थान की दूरी कम होगी, वहीं दूसरी और दोनों प्रदेशों के व्यवसायिक कामकाज बढऩे से विकास को भी गति मिलेगी।

जानकारी के अनुसार चंबल नदी पर सबलगढ़ क्षेत्र के अटार घाट के पुल का निर्माण पूरा हो गया है, इस पुल के बनने से राजस्थान के जयपुर, कोटा, करौली आदि शहरों की दूरी काफी कम हो जाएगी। सबलगढ़ क्षेत्र में अटार-मण्डरायल घाट पर पुल निर्माण की स्वीकृति राजस्थान सरकार ने साल 2018 में दी थी। 121.97 करो? रुपये की लागत वाले 1150 मीटर लंबे 24 पिलर वाले पुल का निर्माण पूरा हो गया है। पुल पर सीसी रोड, रेलिंग से लेकर अन्य फिनिशिंग का काम भी पूरा हो चुका है। हालांकि इस पुल को साल की शुरुआत के साथ ही शुरू किया जाना था, लेकिन अब इस पुल को फरवरी माह में शुरू किया जाएगा, क्योंकि इस पुल के दोनों ओर की डामर की एप्रोच रोड का काम नहीं हो हुआ है, जिसे संभवता सर्दी कम होने पर किया जाएगा, रोड का काम पूरा होते ही पुल शुरू कर दिया जाएगा। दोनों प्रदेश के लोगों को इस पुल के शुरू होने का इंतजार है।


ऐसे कम होगी 145 किलोमीटर की दूरी कम

इस पुल के बनने से सबलगढ़, कैलारस व विजयपुर क्षेत्र से जयपुर राजस्थान की दूरी 225 किलोमीटर रह जाएगी। वर्तमान में जयपुर जाने के लिए 370 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। यानी अटार घाट पुल बनने से जयपुर की दूरी 145 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं दूसरी और राजस्थान के करौली की दूरी 150 किलोमीटर रह जाएगी, जो वर्तमान में मुरैना, बाड़ी, बसेड़ी होकर 210 किलोमीटर से ज्यादा पड़ता है।

बढ़ेगा पत्थर, कपड़ा का कारोबार
इस पुलिया के शुरू होने से दोनों प्रदेशों के बीच पत्थर और कपड़े का व्यापार बढ़ जाएगा, चूंकि राजस्थान में कोटा स्टोन से लेकर सभी प्रकार के मार्बल आदि पत्थर की खान है, ऐसे में मध्यप्रदेश में फिलहाल पत्थर लाने पर 145 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन इस पुलिया के शुरू होने से ये सफर कम होने के कारण पत्थर के दाम में भी थोड़ी गिरावट आएगी, जिसका फायदा घर बनाने वाले लोगों को भी मिलेगा।