
बाजरे की फसल।
रवींद्र सिंह कुशवाह. मुरैना. जिले में 3.25 लाख से ज्यादा कृषि भूमि खाता धारक हैं। किसान हर साल औसतन एक लाख हेक्टेयर में बाजरे की खेती करते हैं। सरकार ने समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीदी शुरू की है तो किसान ऑनलाइन पंजीयन कराने के बाद तय दिनांक को अपनी उपज बेचने तय खरीद केंद्र पर जाते हैं। इस साल भी किसानों ने करीब एक लाख हेक्टेयर में बाजरे की फसल बोई थी। फसल अच्छी थी, लेकिन बाढ़ और बारिश की वजह से बाजरे की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। चंबल के किनारे के 53 गांवों में करीब साढ़े चार हजार हेक्टेयर में बाजरे की फसल को नुकसान हुआ था। इसके बाद बेमौसम बारिश में पकी खड़ी बाजरे की फसल की गुणवत्ता खराब हो गई। सामान्य स्थिति में घर आने वाली फसल में गुणवत्ता को लेकर विवाद की स्थितियां बनती रही हैं तो किसानों ने इस बार ज्यादा पंजीयन में रुचि नहीं ली। किसान रणवीर सिंह कहते हैं कि जब किसान अपनी उपज बेचने जाते हैं तो उसमें तमाम खामियां निकाली जाती हैं। कभी नमी अधिक होने की बात कही जाती है तो कभी दाने का आकार छोटा बताया जाता है। जबकि किसान पूरी तैयारी करके अपनी उपज बेचने आता है। इसके बाद भुगतान के लिए भी चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में किसान 100-200 रुपए कम भाव पर भी अपनी उपज व्यापारियों को बेच देते हैं। इसमें उन्हें समय पर अपना भुगतान भी मिल जाता है और कई दिनों तक नंबर आने, तौल करवाने के लिए इंतजार भी नहीं करना पड़ता है।
8 नवंबर से शुरू हो सकती है खरीद
बाजरा की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए शासन स्तर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देेश नहीं आए हैं। लेकिन अधिकारियों से चर्चा में यह बात सामने आ रही है कि नवंबर के प्रथम सप्ताह के बाद कभी खरीद शुरू की जा सकती है। माना जा रहा है कि ८ नवंबर से समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद शुरू की जा सकती है। जिले में दो दर्जन के करीब समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद के लिए केंद्र्र स्थापित किए गए हैं।
किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला
बाढ़ प्रभावित किसानों की दीपावली इस बार फीकी रही। मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को दीपावली पर निराशा हाथ लगी। जबकि प्रशासन एक माह पहले ही मुआवजे का प्रस्ताव शासन को भेज चुका है। जिले में ५३ गांवों में बाढ़ से फसलों को क्षति हुई थी। बाढ़ से 9672 किसानों की 4123.08 हेक्टेयर में फसलें खराब हुई थीं। प्रशासन ने मूल्यांकन के बाद शासन से 91815192 रुपए की मदद का प्रस्ताव भेजा है।
फैक्ट फाइल-
2.52 लाख हेक्टेयर से अधिक में बोई गई थीं खरीफ फसलें।
1 लाख हेक्टेयर के करीब था बाजरे का रकवा।
13838 किसानों ने कराया है ऑनलाइन पंजीयन।
18500 से अधिक किसानों ने कराया था बीते साल पंजीयन।
6000 किसानों ने बेची थी बाजरे की उपज बीते साल।
कथन-
बीते साल की तुलना में किसानों का पंजीयन 25 फीसदी के करीब कम हुआ है। इसकी वजह जानने की कोशिश की जा रही है। बीते साल 18500 से ज्यादा पंजीयन थे। इस साल बाढ़ और बारिश से फसलों का खराब होना थी कम पंजीयन का एक कारण हो सकता है।
अरुण कुमार जैन, प्रबंधक नान।
Published on:
31 Oct 2019 12:25 pm
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