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बागचीनी थाने के एएसआई ने थाना परिसर स्थित आवास में लगाई फांसी

-भाई के इकलौते बेटे की हत्या के बाद डेढ़ साल से डिप्रेशन में थे एएसआई राकेश यादव-एसपी, एडिशनल एसपी भी बागचीनी थाने पहुंचे, दतिया से आई एफएसएल टीम

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बागचीनी थाने के एएसआई ने थाना परिसर स्थित आवास में लगाई फांसी

बागचीनी थाने के एएसआई ने थाना परिसर स्थित आवास में लगाई फांसी


मुरैना. बागचीनी थाने मेंं पदस्थ एएसआई राकेश यादव ने शनिवार की सुबह दस बजे थाना परिसर स्थित सरकारी आवास में पंखे से साफी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान, एडीशनल एसपी अरविंद ठाकुर और दतिया से आई एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
एएसआई राकेश यादव शुक्रवार को पुलिस लाइन में हुए चुनाव संबंधी प्रशिक्षण में शामिल हुए और रात को पुलिस लाइन स्थित अपने आवास पर रुके और सुबह साढ़े आठ बजे मुरैना से बागचीनी के लिए निकले। थाना परिसर में सरकारी आवास में पंखे से लटककर फांसी लगा ली। बताया जा रहा है पिछले डेढ़ साल से डिप्रेशन के शिकार थे, उनकी दवा भी चल रही थीं। राकेश यादव पहले ट्रैफिक थाना, सिटी कोतवाली रह चुके हैं। 16 सितंबर 2022 को कोतवाली से उनका स्थानांतरण बागचीनी थाने किया गया था। एसपी व एएसपी ने थाना प्रभारी, मृत एएसआई की पत्नी व बेटा से भी बातचीत की और जहां एएसआई ने फांसी लगाई, उस स्पॉट को भी देखा।
भतीजे की हत्या को लेकर डिप्रेशन में थे एएसआई
एएसआई राकेश यादव मूलत: महेन्द्रगढ़ जिला रेवाड़ी हरियाणा के रहने वाले थे। डेढ़ साल पूर्व इनके बड़े भाई के इकलौते बेटे की हत्या हुई थी, उसको लेकर भाई बेहद परेशान रहते थे। उसी के चलते राकेश भी डिप्रेशन के शिकार थे। परिजन व पुलिस अधिकारियों की मानें तो डिप्रेशन की दवा भी चल रही थीं।
कथन
- बागचीनी थाने के एएसआई राकेश यादव ने सुबह दस बजे अपने आवास में फांसी लगा ली है। पुलिस विभाग के लिए यह बड़ी दुखद घटना है। उनकी पत्नी व बेटा आ गए हैं, उनसे चर्चा के दौरान पता चला है कि डेढ़ साल पूर्व उनके बड़े भाई के इकलौते बेटे की हत्या हुई थी, उसको लेकर बड़े भाई काफी परेशान रहते थे, तो राकेश डिप्रेशन के शिकार हो गए, इनकी दवा भी चल रही थी। इसी के चलते उन्होंने फांसी लगा ली।
डॉ. अरविंद ठाकुर, एडीशनल एसपी

ये भी हो सकती है डिप्रेशन की वजह
एएसआई राकेश यादव के बेटे अमित यादव के अनुसार पिताजी ने ऐसा कुछ नहीं बताया था कि उनको कोई परेशानी है, डिप्रेशन के मरीज थे, उनका इलाज भी चल रहा था। दस दिन पहले उन्होंने ट्रांसफर के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन भी दिया था। वह शहर में ट्रांसफर चाह रहे थे, भले पुलिस लाइन मिल जाए।