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भीषण गर्मी में स्कूलों में नौनिहाल पानी को तरसे

जिले के 1000 स्कूलों में नहीं पेयजल की व्यवस्था, पीएचई को लिखा पत्र, पूर्व में पेयजल व्यवस्था पर खर्च किए जा चुके है करोड़ों रुपए फिर पानी नहीं, छात्र व स्टाफ परेशान

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जिले के 1000 स्कूलों में नहीं पेयजल की व्यवस्था, पीएचई को लिखा पत्र, पूर्व में पेयजल व्यवस्था पर खर्च किए जा चुके है करोड़ों रुपए फिर पानी नहीं, छात्र व स्टाफ परेशान

मुरैना. भीषण गर्मी में पानी जीवन के लिए लाइफ लाइन है, लेकिन जिले के 1 हजार सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनमें पेयजल की समस्या बनी हुई हैं। इन स्कूलों में कहीं हैडपंप खराब है तो कहीं कोई जल श्रोत है ही नहीं। जिला शिक्षा केन्द्र से पीएचई विभाग को पत्र लिखकर पेजयल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।


जिले के 2020 शासकीय स्कूल एवं 937 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बोर कराकर मोटर डालना, प्लेटफॉर्म तैयार कर नल टोंटी लगाना और स्कूल छत पर दो टंकी रखकर उनसे नल लाइन का कनेक्शन करने का पीएचई विभाग ने ठेका दिया था। 1.25 लाख रुपए प्रति योजना के हिसाब से करीब 40 करोड़ की राशि खर्च हुई थी लेकिन उन योजनाओं में से 80 प्रतिशत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। कहीं प्लेटफॉर्म टूट गया, कहीं नल-टोंटी तो कहीं टंकी के कनेक्शन नहीं हैं और कई स्कूलों में बोर ही नहीं कराए गए, पुराने हैडपंपों में मोटर डाल दी गई थी लेकिन अधिकारियों की सांठगांठ के चलते उनकी मॉनीटरिंग नहीं की गई और आज ये योजनाएं ठंप पड़ी हैं। करोड़ों रुपया बेकार चला गया। अब नए सिरे से शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के संस्था प्रभारियों से जानकारी ली तो पता चला है कि जिले के 2600 स्कूलों में से 1 हजार स्कूल ऐसे हैं जिनमें पेयजल की प्रोपर व्यवस्था नहीं हैं। सबसे पहाडगढ़़, जौरा, रामपुर, सबलगढ़, कैलारस के ग्रामीण अंचल के स्कूलों की हालत ज्यादा खराब है।

हादसे के बाद दिए थे जांच के निर्देश

वर्ष 2022 में पीएचई ठेकेदार द्वारा बनाए प्लेटफॉर्म के क्षतिग्रस्त होने पर दो अलग- अलग स्कूलों में दो बच्चों की मौत और दो के घायल होने पर तत्कालीन कलेक्टर अंकित अस्थाना ने जांच के निर्देश दिए थे लेकिन बाद में जांच पूरी नहीं हो सकी और कोई बड़ी कार्रवाई भी नहीं हुई। पुलिस जरूर ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जो अभी तक विचाराधीन हैं।

केस-01

शासकीय माध्यमिक विद्यालय परसौटा में सवा लाख रुपए खर्च कर पानी की व्यवस्था की गई थी, जो कुछ महीने बाद ही ठप हो गई। अब स्थिति यह है कि स्कूल में पीने के अलावा मध्यान्ह भोजन के लिए भी पानी नहीं हैं। महिला रसोइयों को स्कूल से करीब एक किमी दूर नहर पर लगे हैडपंप से पानी भरकर लाना पड़ता है तब मध्यान्ह भोजन तैयार होता है। उसी हैडपंप पर बच्चे पानी पीने जाते हैं। नहर में पानी चलता है तो खतरा रहता है।

केस-02

शासकीय प्राथमिक विद्यालय चचेड़ी का पुरा पेजयल के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म क्षतिग्रस्त पड़ा है। उससे टोंटी भी गायब हैं। छत पर रखी टंकियां शोपीस बनकर रह गई हैं। स्कूल परिसर में हैडपंप तो है लेकिन पानी साफ नहीं हैं, इसलिए स्टाफ व बच्चे अपने घर से पानी लेकर आते हैं। स्कूल प्रबंधन ने वरिष्ठ अधिकारियों को पेयजल व्यवस्था बनाने के लिए लिखा है।

ये बोले जिम्मेदार

जिले के 1000 स्कूल ऐसे हैं जहां पानी की प्रोपर व्यवस्था नहीं हैं। इनमें से कुछ के हैडपंप पानी सही नहीं दे रहे हैं, तो कुछ के हैडपंप लटक गए हैं, उनको दुरस्त कराने के लिए पीएचई को पत्र लिखा है।

हरीश तिवारी, डीपीसी, मुरैना

स्कूलों में पेयजल समस्या गंभीर मामला है। पीएचई के कार्यपालन यंत्री को निर्देशित करके जल्द ही व्यवस्था सुदृढ़ कराई जाएगी।

अश्वनी कुमार रावत, अपर कलेक्टर, मुरैना