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10वीं सदी से इतिहास में दर्ज है बिरूंगा गांव

900 साल पुराने खिरनी के पेड़ अमर किए हैं गांव का नाम

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10वीं सदी से इतिहास में दर्ज है बिरूंगा गांव

10वीं सदी से इतिहास में दर्ज है बिरूंगा गांव

मुरैना. 10वीं सदी की अनेक पुरा संपदाओं से समृद्ध जिले में 900 साल से भी ’यादा पुराने खिरनी के पेड़ किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। सुमावली में बिरूंगा गांव के पास खिरीखोह में मजबूत जड़ों से जमीन को पकड़े इन पेड़ों के सुरक्षित बने रहने का प्रमुख कारण चारों ओर से पहाड़ों से घिरा होना है।

इंटेक के पास इनके संरक्षण का प्रस्ताव भेजने की बात पुरातत्व विभाग कह तो चुका है, लेकिन इस दिशा में अब तक ठोस प्रयास नहीं हुए हैं। जिला पुरातत्व अधिकारी अशोक शर्मा कहते हैं कि खिरनी के यह पेड़ विभागीय अध्ययन में 800-900 साल पुराने सिद्ध हो चुके हैं। इनका संरक्षण स्थानीय स्तर पर तो संभव नहीं है। इसलिए संरक्षण का प्रस्ताव इंडियन नेशनल ट्रस्त फॉर आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज नई दिल्ली भेजने की बात कही जा रही है। वनस्पति शास्त्री भी यह बात मानते हैं कि रीठा कुल के खिरनी पेड़ की उम्र अन्य पेड़ों की तुलना में अधिक (500-600 साल तक) होती है।

ग्रामीणों का दावा- 1500 साल पुराने होने का

गांव के लोगों का तो दावा है कि इन पेड़ों की उम्र 1500 साल तक है। क्योंकि इनके बारे में वे अपने पूर्वजों से सुनते आए हैं। नीम जैसे दिखने और तासीर वाले इन पेड़ों की पत्तियां उबालकर नहाने से चर्मरोग तक ठीक हो जाते हैं।