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खजुराहो के मंदिरों की तर्ज पर बना है चांचुल का प्राचीन शिव मंदिर

- 1000 साल पुराना शिव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र, दर्शन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु

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खजुराहो के मंदिरों की तर्ज पर बना है चांचुल का प्राचीन शिव मंदिर

खजुराहो के मंदिरों की तर्ज पर बना है चांचुल का प्राचीन शिव मंदिर


मुरैना. जिले में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं लेकिन चांचुल में स्थित भोलेनाथ का यह मंदिर खास है, जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर पहाडगढ़़ के जंगलों में स्थित यह मंदिर 11वीं सदी का बताया गया है। आज भी देखकर लगता नहीं कि यह शिवालय 1000 साल पुराना है. स्थानीय लोग इसे चंबल का खजुराहो भी कहते हैं। क्योंकि यह शिव मंदिर खजुराहो में बने मंदिरों की तर्ज पर ही बना है।
ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण बंजारा जाति के लोगों ने यहां करवाया था, यह मंदिर देखने में बेहद खूबसूरत व आकर्षक लगता है। इस पर की गई नक्काशी खजुराहो मंदिरों की तर्ज पर है। 1000 साल बाद भी यह मंदिर अभी अच्छी स्थिति में है यहां प्रतिदिन पूजा होती है और ग्रामीण और आस पास के लोग यहां आकर दर्शन करते है। जब लोग यहां माता निरारा मंदिर जाते हैं तो इस मंदिर के दर्शन किए बिना नहीं जाते है।
इनका कहना हैं
चांचुल का शिव मंदिर 11 वीं शदी यानि कि एक हजार वर्ष पुराना हैं। इसका निर्माण खजुराहो के मंदिरों की तर्ज पर ही है। इस पर की गई नक्काशी सेम खजुराहो के मंदिरों जैसी ही है। बताते हैं कि इसका निर्माण उस समय बंजारों ने करवाया था। अगर सरपंच प्रस्ताव भेजते तो हम उसकी और मरम्मत भी करवा देते।
अशोक शर्मा, जिला पुरातत्व अधिकारी

ग्रामीणों ने कहा- आसपास नहीं हैं ऐसा शिव मंदिर
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर को पुराना शिव मंदिर के नाम भी जानते हैं। गांव के लोग नियमित रूप से यहां पूजा करते हैं। ग्रामीणों का कहना हैं कि ऐसा मंदिर आसपास के क्षेत्र में नहीं है और यह काफी प्राचीन है। इसे स्थानीय ग्रामीण चांचुल का खजुराहो भी कहते हैं। ग्रामीण रामस्वरूप सिंह व मातादीन सिंह का कहना हैं कि मंदिर के अंदर स्थित शिवलिंग काफी आकर्षक व सुंदर है जिसकी ग्रामीण रोजाना पूजा करते हैं।