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Lok Sabha Election 2019: भड़ाना को लेकर बसपा चुप, भाजपाई-कांग्रेसी कर रहे कमेंट

Lok Sabha Election 2019: भड़ाना को लेकर बसपा चुप, भाजपाई-कांग्रेसी कर रहे कमेंट

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Lok Sabha Election 2019: भड़ाना को लेकर बसपा चुप, भाजपाई-कांग्रेसी कर रहे कमेंट

मुरैना. मुरैना-श्योपुर लोकसभा क्षेत्र से बसपा द्वारा पहले घोषित किए गए प्रत्याशी डॉ. रामलखन सिंह कुशवाह को बदल देने के बाद हरियाणा के गुर्जर नेता करतार सिंह भड़ाना को अप्रत्याशित रूप से प्रत्याशी घोषित कर दिए जाने के बाद बसपा तो चुप है, लेकिन भाजपाई और कांग्रेसी नेता कमेंट कर भड़ाना को बाहरी प्रत्याशी बताकर विरोध कर रहे हैं।

भड़ाना को प्रत्याशी घोषित करने के बाद कांग्रेस की पहली बैठक में भी इस पर गुर्जर समाज के नेताओं ने विरोध जताया और बाद में सोशल मीडिया पर भी समाज के ही नेताओं में अंतर्विरोध झलका। कांग्रेस की ओर से सुमावली विधायक ऐंदल सिंह कंषाना, मुरैना विधायक रघुराज कंषाना, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राकेश मावई एवं गुर्जर विकास संगठन के वीरेंद्र हर्षाना रांसू भी बाहरी प्रत्याशी बताकर विरोध दर्ज करवा चुके हैं। भाजपा के पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने भी भड़ाना पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा ने एक बाहरी राजनीतिक व्यक्ति को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। वह व्यक्ति जो प्रदेश की समस्याओं, किसानों व गरीबों की परेशानियों को नहीं समझता। ऐसे व्यक्ति को चुनाव में कोई भी समाज समर्थन क्यों देगा.?

यह सवाल राजनीतिक गलियारों में अब भी चर्चा में है कि भड़ाना बिना किसी आधार के तो हरियाणा और यूपी के बाद मप्र के मुरैना में लोकसभा का चुनाव लडऩे नहीं आए होंगे। खबर है कि भड़ाना की मुरैना जिले में रिश्तेदारियां हैं और वे यदाकदा यहां आते भी रहे हैं, लेकिन चुनाव लड़ेंगे इसकी पहले से कोई चर्चा नहीं थी। शुरूआती सक्रियता के बाद जब शुरू में घोषित प्रत्याशी डॉ. रामलखन सिंह का चुनाव प्रचार सुस्त होने लगा तो लोगों ने कयास लगाए थे कि टिकट किसी और का हो सकता है, लेकिन भड़ाना के बारे में किसी को अनुमान नहीं था। ऐसे में भड़ाना का सबसे पहले विरोध कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मावई ने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत के साथ पहली मीटिंग में किया।

उन्होंने ही भड़ाना को भाजपा का मैनेज प्रत्याशी बताया था। हालांकि भड़ाना दो दिन पहले समाज के साथ एक मीटिंग में यह दावा कर चुके हैं कि उन्हें कोई खरीद नहीं सकता, लेकिन नगर निगम में पार्षद एदल मावई सोशल मीडिया पर भड़ाना के विरुद्ध सबसे पहले मोर्चा खोलने वालों में से एक थे। हालांकि अब उनके तेवर ठंडे दिख रहे हैं। टिप्पणियां तो यहां तक की गई थीं कि एक बार रिश्तेदार से पीछा छूटा तो दूसरे आ गए, इसलिए समाज सावधान रहे। लोगों का आक्रोश इस बात पर भी था कि क्या जिले में समाज में ऐसा कोई नेता नहीं था जिसे प्रत्याशी बनाया जा सके।