
स्कूल भवनों की मरम्मत पर करोड़ों उड़ाए, प्लास्टर के नाम पर छतों पर डाला सीमेंट का घोल
मुरैना. जिले के122 हाईस्कूल के भवनों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी की सांठगांठ के चलते चंद भाजपा के लोगों ने मरम्मत के नाम पर अधिकांश भवनों में औपचारिकता पूरी की गई है। कुछ ही महीने पहले मरम्मत कराई गई है, फिर भी कहीं छत का प्लास्टर उखड़ रहा है तो कहीं दीवार पर कलर करने के बाद भी पूर्व की लिखावट स्पष्ट पढऩे में आ रही है। इससे स्पष्ट होता है कि स्कूलों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ पैसा कबाड़ा गया है, जिला शिक्षा अधिकारी ने बिना मॉनीटरिंग के आंख बंद करके बिलों का भुगतान कर दिया।
यहां बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के तहत 39.60 करोड़ की राशि से जिले के 132 हाईस्कूलों के भवनों की मरम्मत होनी थी। इनमें से दस अपात्र होने पर 122 स्कूलों के भवनों की मरम्मत कराई गई। इस पर 36.60 करोड़ की राशि के बिल तैयार किए गए। इनमें से 93 स्कूलों की मरम्मत का 27.90 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। जबकि राशि न मिलने पर अभी 29 भवनों की मरम्मत का पैसा लटका हुआ है। भवनों की मरम्मत कराने के लिए 30 के करीब फर्मों को काम दिया गया। इनमें से कुछ भाजपा नेताओं की तो कुछ अधिकारियों की फर्म बताई गई हंै। इन स्कूलों की मरम्मत का कार्य नवंबर 2022 से मार्च 2023 के बीच कराया गया है।
मुरैना गांव हाइस्कूल भवन की छत उखड़ी
शासकीय हाइस्कूल मुरैना गांव के भवन की छत किए बिना ही सीमेंट का घोल डाला गया जिससे सीमेंट अपने आप निकल रही है। वहीं दीवार पर कलर इतना हल्का किया है कि जो लिखावट पहले से लिखी थी, वह स्पष्ट रूप से पढऩे में आ रही है। इसके अलावा दीवार कई जगह से उखड़ रही है, उसमें सीमेंट लगाए बिना ही कलर कर दिया है।
दीवारों में पड़ी दरार, छत पर कर दिया प्लास्टर
शहर के शासकीय नवीन हाइस्कूल क्रमांक एक जो कि मिडिल स्कूल में संचालित है, उसकी दीवार कई जगह से दरार दे रही हैं, उसकी मरम्मत न कराते हुए छत पर प्लास्टर करके तीन लाख का भुगतान कर दिया गया है। जबकि नियमानुसार जिस संस्था पर स्वयं की बिल्डिंग है तो उस पर काम होना चाहिए था, यह संस्था तो मिडिल स्कूल की बिल्डिंग में संचालित हैं।
इन फर्मों ने किए कार्य
शिक्षा विभाग ने जिन फर्मों से काम कराए उनमें एन के बी कंसट्रेक्शन, पीएस इंटरप्राइजेज, एल एम कंसटे्रक्शन, चैतन्य कंसट्रेक्शन, एम एस अंकित इंटरप्राइजेज, आर्यन कंसट्रेक्शन, आर एम आर, जय बजरंग सहित करीब 30 फर्म शामिल हैं। इनमें से चार फर्म इंदौर की और चार भाजपा नेताओं के परिजन या रिश्तेदारों की हैं। इनमें से सबसे अधिक कार्य एल एम, एम एस अंकित, चैतन्य, एन के बी ने कराए हैं।
एक स्कूल अपात्र फिर भी कराया कार्य
शासकीय उम्मेदगढ़ बांसी स्कूल में बिल्डिंग नई हैं। यहां काम पहले ही हो चुका था। संस्था अपात्र थी फिर भी यहां विभाग के अपर संचालक के रिश्तेदार से काम कराया गया और नियम विरुद्ध भुगतान भी करा दिया। इसी तरह दीपेरा स्कूल में स्कूल मैंनेजमेंंट कमेटी पूर्व में अगस्त में काम करा चुकी है, उसके बाद भी दोबारा भुगतान कराया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
- 39.60 करोड़ में होनी थीं जिले के 132 स्कूल भवनों की मरम्मत।
- 03 लाख रुपए की राशि आई थी एक स्कूल के लिए।
- 10 स्कूल भवन पाए गए अपात्र।
- 36.60 करोड़ से कराई 122 स्कूल भवनों की मरम्मत।
- 27.90 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है 93 स्कूल भवनों की मरम्मत का
- 30 फर्मों ने कराई स्कूल भवनों की मरम्मत।
- 2022 नवंबर से मार्च 2023 तक पूरा किया काम।
ईओडब्ल्यू में जा सकता है मामला
जिले के स्कूल भवनों की मरम्मत के नाम पर बड़ा भृष्टाचार किया गया है। यह मामला ईओडब्ल्यू में भी जा सकता है। इसमें कुछ भाजपा नेताओं के साथ विभागीय अधिकारी भी मिले हुए हैं। इन भृष्टाचार करने वालों को जिले के भाजपा के बड़े पदाधिकारी का आशीर्वाद प्राप्त है। उनके फोन पर ही अधिकारी आंख बंद करके भुगतान करते गए लेकिन उन्होंने भुगतान से पूर्व यह नहीं देखा कि बिल्डिंगों की मरम्मत कराई भी है कि नहीं। पोरसा क्षेत्र में मरम्मत के नाम पर सबसे ज्यादा गड़बड़झाला हुआ है। यहां ऐसे स्कूल भवन भी सामने आए हैं जिनके फोटो फाइल में लगे हैं, उनकी बिल्डिंग पर पहले ही पुताई हो चुकी थी फिर भी दोबारा उनकी पुताई के नाम पर औपचारिकता पूरी की गई और पूरा भुगतान भी कबाड़ लिया गया।
Published on:
03 Oct 2023 09:24 pm
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