
डिवाइस का अंदर का ढांचा
मुरैना. करीब 4 इंच की यह डिवाइस एक साधारण मोबाइल के बराबर होगी और इसे जेब या बेल्ट में लगाया जा सकता है। इसे 2.5 इंच भी किया जा सकता है।
केशव कॉलोनी में रहने वाले उपेंद्र जैन ने ग्वालियर की आईटीएम यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। एक प्राइवेट कंपनी में इंदौर में वे जॉब कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौर में वे काम बंद होने से अपने घर लौट आए। इस दौरान कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण की वजह सामाजिक दूरी का पालन न हो पाना सामने आई। कई बार लोग अज्ञानता में यह करते हैं और कई बार इसका ध्यान नहीं रहता और अनजाने में उल्लंघन हो जाता है। सभी जगह भीड़ में कोई टोकने वाला तो नहीं होता। ऐसे में युवा इंजीनियर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए सस्ती और सरल तकनीक खोजने में जुटा। उसने दो दिन की मेहनत के बाद एक डिवाइस तैयार की जो लोगों को तय दूरी सेट करने के बाद उसके दायरे से भीतर कोई भी वस्तु आने पर लाइटिंग और साउंड से सतर्क करेगी।
कैसे आया डिवाइस का आइडिया
युवा इंजीनियर जैन ने कुछ समय पहले वाहन पार्किंग स्थलों पर आपस में टकराने से बचाने के लिए यह डिवाइस तैयार की थी। लेकिन बाद में का में व्यस्त हो जाने से इसे बीच में ही छोड़ दिया। जब कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा और सोशल डिस्टेंसिंग के लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासनिक अधिकारी इतने चिंतित दिखे तो कुछ नया करने का मन में आया। उपेंद्र के अनुसार उसने लॉक डाउन-3 के दौरान इस डिवाइस को संशोधित करके लोगों के उपयोग के काबिल बना दिया। फिलहाल इसकी लागत करीब 500 रुपए आएगी, लेकिन बाजार सामान्य होने पर छोटी व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान सहज मिलने पर इसमें और संशोधन कर लागत कुछ और कम की जा सकती है।
क्या इस्तेमाल किया गया डिवाइस में
बकौल जैन मोबाइल जैसी दिखने वाली इस डिवाइस में मुख्य काम अल्ट्रासोनिक सेंसर का है। इसके अलावा एडाफ्रूट सील्ड, एलईडी, स्पीकर एवं ऑडरीनो लगाया गया है। इसे इनबिल्ट बैटरी और 9 वोल्ट की फिंगर साइज बैटरी लगाकर उपयोग किया जा सकता है। इसकी रेंज 3 से 5 फीट तक रखी गई है। जरूरत के हिसाब से इसे सेट किया जा सकता है।
Published on:
18 May 2020 08:53 am
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