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जैन मुनि बोले: समता भाव से कर्मों के दंड को सहन करना चाहिए

विलोक सागर महाराज ने कहा कि समता के साथ सहन करने से कर्म पुन: नहीं सताएंगे। समता के साथ सहन करने से कर्मों की निर्जरा हो जाती है।

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मुरैना. दिगम्बर बड़ा जैन मंदिर में संत मुनि विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्म का जब उदय आता है तब हम साधुत्व हो जाते है और जब कर्म बंध करते हो तब सो जाते हो। कर्म बंध भोगने की अवस्था में चीखते चिल्लाते हो। जो हो गया सो हो गया, अब चीखने चिल्लाने से क्या फायदा। कर्म बंध को समता के साथ सहन करलो।

जैन मुनि ने कहा कि समता के साथ सहन करने से कर्म पुन: नहीं सताएंगे। समता के साथ सहन करने से कर्मों की निर्जरा हो जाती है। यदि हमने कर्मों को समता के साथ सहन नहीं किया, किसी दूसरे पर उसका दोषारोपण किया तो कर्म पुन: आकर हमें सताएंगे, हमें परेशान करेंगे। इसलिए हमें सांसारिक जीवन में समता और सरलता रखनी चाहिए, ताकि हमारे जीवन में कर्मों की निर्जरा हो सकें और हम शांति के साथ, सुखमय जीवन जी सकें।

अच्छे कर्म करोगे तो मिलेगी सुख शांति

जैन मुनि ने कर्म सिद्धांत को समझाते हुए बताया कि कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ते। वे सदैव हमारे साथ चलते हैं। प्राणी जैसे कर्म करता है, उसी अनुरूप उसे परिणामों की प्राप्ति होती है। आप अच्छे कर्म करोगे तो आपको सुख और शांति की अनुभूति होगी, खोटे कर्म करोगे तो दुख और अशांति की अनुभति होगी। इसीलिए हमें अपने हृदय में अपने इष्ट को धारणकर पूजा पाठ ध्यान में लीन रहकर सात्विक जीवन जीना चाहिए। यदि आपने अपने इष्ट को हृदय में धारण नहीं किया, पूजन तप ध्यान नहीं किया, सत्कार्य नहीं किए तो आपका जीवन दुखमय होने से कोई नहीं रोक सकता।

22 को होगी भगवान महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता

तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से आमजन को परिचित कराने के उद्देश्य से बड़े जैन मंदिर में 22 मई को शाम 06.45 से 07.45 तक तीर्थंकर भगवान महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। इस प्रतियोगिता में जैन अजैन कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है। युगल मुनिराजों की प्रेरणा एवं पावन सान्निध्य में होने जा रही प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भगवान महावीर के जीवन चरित्र से संबंधित होगी। जिसमें 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले सभी बंधुओं, माता बहनों को भगवान महावीर से संबंधित 150 प्रश्नोत्तरी का पेपर, उत्तर सहित पहले ही वितरित किया जा रहा है। सभी प्रतियोगी घर पर तैयारी करें और 22 मई को बड़े जैन मंदिर में प्रतियोगिता में सम्मिलित हों। प्रतियोगिता के पश्चात उत्कृष्ट प्रतियोगियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।