
रूस-यूक्रेन की शांति के लिए यात्रा करेंगी जिल बहन
मुरैना. अभी हाल ही में जापान के टोक्यों में अंतर्राष्ट्रीय नवीनो शांति पुरस्कार से सम्मानित होकर चंबल घाटी आए गांधीवादी विचारक पी वी राजगोपलन ने कहा कि अब हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती आई है कि रूस व यूक्रेन की अशांति को खत्म करने के लिए क्या करना हैं। इसके लिए दस जून को जिल बहन जा रही हैं जो जार्जिया से रूस के बॉर्डर तक शांति यात्रा निकालकर वहां माहौल बनाएंगी और भारत की तरफ से एक संदेश भी देंगी। यह बात राजगोपालन ने रेस्ट हाउस पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। इससे पूर्व चंबल घाटी के लोगों ने रेस्ट हाउस पर राजगोपालन व जिल बहन का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया।
जो गरीबों को न्याय दिलाने अर्थात जल जंगल जमीन का जो काम हुआ है, उस पर उन्होंने कहा कि सिर्फ बंदूक नीचे रखने से हिंसा खत्म नहीं होती। समाज में तो कई प्रकार की हिंसा है। जिसको हम प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष हिंसा कहते है। प्रत्यक्ष हिंसा तो खत्म हो गई है लेकिन अप्रत्यक्ष हिंसा खत्म नहीं हुई है, अगर अप्रत्यक्ष खत्म नहीं होगी तो प्रत्यक्ष ङ्क्षहसा फिर से सामने आ सकती है। इसलिए इस दिशा में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि दुनियां को जरूरत शांति की है। दुनियां के लोग ये समझना चाहते हैं कि अशांति से शांति की ओर यात्रा कैसे हो सकती है। उसको जानने के लिए चंबल घाटी आना होगा। अशांति की ओर जाने का काम पुलिस व आर्मी के भरोसे नहीं हो सकता जब तक लोग साथ नहीं देगे, शांति कायम नहीं हो सकती। चंबल घाटी में जो सबक है कि न्याय से शांति की ओर, न्यायपूर्ण व्यवस्था होगी तो शांति कायम करना आसान होगा। इस बात को लोग समझने लगे हैं। इसलिए वो गांधी आश्रम, एकता परिषद, चंबल घाटी के काम को बहुत महत्व देने लगे हैं। उसको लेकर कई जगह चर्चा हुई। प्रेस वार्ता में चर्चा हुई कि चंबल घाटी में लोग बंदूक छोडकऱ कैसे जेल जाने को तैयार हो गए।
शेर पालने से अर्थ व्यवस्था नहीं सुधरती
दो हजार के नोट बंद करने के सवाल पर राजगोपालन कहा कि अर्थ व्यवस्था को ७५ साल में अंहिसक नहीं बना सके। ग्रामीण क्षेत्र में पूरी अर्थ व्यवस्था है वह हिंसक व्यवस्था है। शेर पालते हैं और आदिवासी से कहते हैं कि बाहर निकल जाओ। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी से अर्थव्यवस्था सुधर सकती है लेकिन सरकार ऊपर बैठे कुछ लोगों के हिसाब से तय करती है, उससे अर्थव्यवस्था नहीं सुधरेगी।
सरकार ने स्वागत तो किया लेकिन एग्र्रीमेंट पर अमल नही ं
राजगोपालन ने कहा कि जल, जंगल, जमीन को लेकर हमने वर्ष २००६-०७ में जो आंदोलन किए उस समय केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य लोगों ने स्वागत तो किया लेकिन आगरा में एग्रीमेंट पर जो साइन हुए। उन्होंने कहा कि जल जंगल जमीन को लेकर वर्तमान केन्द्र सरकार गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आगामी चुनाव को लेकर कहा कि आगरा एग्रीमेंट पर हम जानना चाहते हैं कि किस पॉल्टीकल पार्टी का क्या रुख रहेगा। आने वाले दिनों में क्या निर्णय लेंगे, उसी हिसाब से हम भी आगामी निर्णय लेंगे।
शेर पालने से अर्थ व्यवस्था नहीं सुधरती
दो हजार के नोट बंद करने के सवाल पर राजगोपालन कहा कि अर्थ व्यवस्था को ७५ साल में अंहिसक नहीं बना सके। ग्रामीण क्षेत्र में पूरी अर्थ व्यवस्था है वह हिंसक व्यवस्था है। शेर पालते हैं और आदिवासी से कहते हैं कि बाहर निकल जाओ। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी से अर्थव्यवस्था सुधर सकती है लेकिन सरकार ऊपर बैठे कुछ लोगों के हिसाब से तय करती है, उससे अर्थव्यवस्था नहीं सुधरेगी।
Published on:
22 May 2023 03:02 pm
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