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लाखों रुपए खर्च, न बोर हुए और न बनी टंकी, विभागीय उदासीनता

- दो साल पहले सडक़ खोदकर पाइप लाइन बिछाई, खुले में पड़ी है लाइन, मजबूरन 200 साल पुराने कुएं के गंदे पानी से बुझा रहे प्यास - ग्राम पंचायत बरहाना में पीएचई विभाग और ठेकेदार की मनमानी के चलते अधूरी पड़ी नल जल योजना

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मुरैना. जनपद पंचायत जौरा की ग्राम पंचायत बरहाना में दो साल बाद भी न बोर हुआ और न टंकी का निर्माण करवाया गया है। एक बोर किया था, वह फेल हो गया। ग्रामीण मोटर डालकर 200 साल पुराने कुए का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार की ढील से योजना अधर में पड़ी है।
यहां बता दें कि 2300 की आबादी वाली ग्राम पंचायत बरहाना में 9 जनवरी 2023 को 52.29 लाख की लागत से नल जल योजना का कार्यादेश हुआ था। जिसमें से 9.47 लाख रुपए का काम होना बताया गया है जबकि ग्रामीणों के मुताबिक काम न के बरावर हुआ है। गांव में नल जल योजना का कार्य कराने के लिए मैं. सूरज कंस्ट्रक्शन कंपनी को अनुबंध किया था। निर्माण एजेंसी द्वारा दो साल पूर्व गांव में सडक़ खोदकर उसमें पाइप लाइन डाली गई, हर घर के सामने पाइप लाइन में से एक इंच का पाइप निकालकर डाल दिया जो आज तक पड़ा है। एक बोर कराया था, वह फेल हो गया। सडक़ थी, वह भी खोद दी गई। स्थिति यह है कि जो पाइप कनेक्शन के लिए निकाले थे, वह गंदी नालियों या फिर पेड़ व दीवार के सहारे लटकी हुई हंैं। ग्रामीणों ने अपने अपने पैसों से 200 साल पुराने कुए में मोटर डाल रखी हैं, उससे लेजम के माध्यम से लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा है। बारिश के समय कुए से गंदा पानी निकलता है लेकिन मजबूरी में पीना पड़ रहा है।
ग्रामीण बोले: सीएम हेल्पलाइन भी लगाई, नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों का कहना हैं कि पीएचई विभाग के क्षेत्र के एसडीओ रवि बाजपेयी और कार्यपालन यंत्री एस एल बाथम कार्यालय मे ंमिलते नहीं हैं, मोबाइल लगाओ तो रिसीव नहीं करते। अधिकांश अधिकारी ग्वालियर से अपडाउन करते हैं। मजबूरन ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है, लेकिन उसके बाद भी कोई निराकरण नहीं किया गया है।
क्या कहते हैं ग्रामीण

  • दो साल पूर्व पाइप बिछाए थे, उसके बाद जो घरों के लिए छोटी लेजम डाली थीं, वह खुली पड़ी हैं। मजबूरन कुए में मोटर व लेजम डालकर पानी भर रहे हैं, अगर कुआ नहीं होता प्यासे मर जाते।रामस्वरूप शर्मा, ग्रामीण
  • पाइप लाइन बिछाए हुए दो साल हो गए। मैंने तीन बार सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। मजबूरी में गंदा पानी पी रहे। जिला मुख्यालय पर विभाग में शिकायत करने गए तो वहां एसडीओ व ईई कार्यालय में नही मिले।राहुल शर्मा, ग्रामीणकथन
  • ई ई पीएचई को बोला है कि विस्तृत जांच करें, जब तक योजना का स्थायी समाधान नहीं होता है, तब कुआ में साफ सफाई करवाएं और उसमें दवा डलवाएं।सी बी प्रसाद, अपर कलेक्टर