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महापौर ने मांगा स्पष्टीकरण, कहा- ऑनलाइन टेंडर खुला फिर ऑफलाइन डोकोमेंट कैसे कर दिए सम्मिट

- पहले नहीं मांगा था डीलरशिप का लेटर, उसी का बहाना लेकर कर दिया 2000 एलइडी का टेंडर निरस्त

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महापौर ने मांगा स्पीष्टीकरण, कहा- ऑनलाइन टेंडर खुला फिर ऑफलाइन डोकोमेंट कैसे कर दिए सम्मिट

महापौर ने मांगा स्पीष्टीकरण, कहा- ऑनलाइन टेंडर खुला फिर ऑफलाइन डोकोमेंट कैसे कर दिए सम्मिट

मुरैना. नगर निगम के 47 वार्डों के लिए बुलाए टेंडर आयुक्त ने निरस्त कर दिए और अंतिम फैसले के लिए महापौर की तरफ फाइल भेज दी। महापौर ने आयुक्त को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है और कहा है कि जब टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन थी फिर ऑफलाइन डोकोमेंट कैसे सम्मिट कर दिए।
यहां बता दें कि नगर निगम के 47 वार्डों के लिए 2000 एलइडी क्रय किए जाने के लिए टेंडर कॉल किया गया। तीन फर्मों के टेंडर फॉर्म आए। सबसे कम रेट की फर्म का टेंडर स्वीकृत करते हुए नोटशीट आगे के लिए प्रस्तावित कर दी लेकिन बाद में दूसरे नंबर की फर्म के टेंडर आवेदन में डीलरशिप के लेटर लगाकर पहली वाली फर्म का टेंडर निरस्त यह आपत्ति लगाकर निरस्त कर दिया कि टेंडर फॉर्म में डीलरशिप का अथोराइज्ड लेटर नहीं लगा था। विशेष तो यह है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन थी फिर बाद में डोकोमेंट कैसे सम्मिट हो गए।
कमेटी के सामने खुले टेंडर, उस समय क्यों नहीं की आपत्ति
एलइडी के टेंडर खोलने के लिए नगर निगम में टैक्नीकल कमेटी गठित की थी, उसमें निर्माण शाखा के कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री, उप यंत्री शामिल थे। इस कमेटी के सामने टेंडर खोला गया। वहीं विज्ञप्ति प्रकाशित हुई तब उसमें सारी शर्तों का हवाला दिया था लेकिन उसमें कहीं नहीं लिखा था डीलरशिप का लेटर सम्मिट करना हैं। यह शिगूफा तब छोड़ा गया जब नेताजी की फर्म को काम नहीं मिला। अधिकारियों की मेहरबानी देखिए कि सारी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी हुई और टेंडर खुलने के बाद नेताजी की फर्म के कागजों में डीलरशिप का लेटर ऑफलाइन जोड़ कर नंबर एक की फर्म का टेंडर फॉर्म पर सवाल खड़ा कर दिया और नेताजी की फर्म को टेंडर देने की तैयारी कर ली लेकिन मामला तूल पकड़ा तो टेंडर ही निरस्त कर दिया। अब अंतिम मुहर के लिए महापौर की तरफ फाइल बढ़ा दी है।
ये रेट मिलीं टेंडर फॉर्मों में
जिन फर्मों के टेंडर बुलाए गए उनमें से हरिओम बांदिल की 15.90 प्रतिशत ब्लो, श्रीनाथ इंटरप्राइजेज की 36.69 प्रतिशत ब्लो रेट प्राप्त हुई। एक अन्य फर्म और थी जिसकी दूसरे नंबर पर 27 प्रतिशत ब्लो की रेट प्राप्त हुई। श्रीनाथ इंटरप्राइजेज की रेट सबसे कम होने पर नगर निगम ने टेंडर स्वीकार करते हुए कार्रवाई आगे बढ़ा दी। नोटशीट चलाने के बाद श्रीनाथ इंटरप्राइजेज के फॉर्म में कमी निकालते हुए टेंडर ही निरस्त कर दिया।
कार्यपालन यंत्री से प्रभार हटाने लामबंद हुए पार्षद
कार्यपालन यंत्री प्रदीप जादौन से प्रभार हटाकर किसी अन्य इंजीनियर को देने के लिए पार्षद लामबंद हो गए हैं। इसमें भाजपा, कांग्रेस, बसपा, निर्दलीय सहित करीब 40 पार्षद शामिल हैं। सभी के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन महापौर को दिया है। संभवतह आगामी एमआइसी की बैठक में इस मामले पर विचार किया जाएगा।
कथन
- एलइडी क्रय करने का टेंडर निरस्त करने फाइल हमारे पास आई थी, हमने आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा है कि पूरी प्र्रक्रिया ऑनलाइन थी फिर ऑफलाइन डोकोमेंट कैसे सम्मिट हो गए। साथ ही टैक्नीकल कमेटी के सामने टेंडर फॉर्म खोले गए, उस समय कोई कमी नहीं थी फिर बाद में क्या कमी निकली जिससे टेंडर निरस्त करने की आवश्यकता पड़ी। कार्यपालन यंत्री के खिलाफ सभी पार्टी के 40 पार्षदों ने लिखकर दिया है, एमआइसी की बैठक में इस पर विचार किया जाएगा।
शारदा राजेन्द्र सोलंकी, महापौर, नगर निगम