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जेल में पिटाई के 24 घण्टे बाद कैदियों का मेडिकल परीक्षण

कोर्ट ने शनिवार की शाम को ही जारी कर दिया था आदेश

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कैदियों का मेडिकल परीक्षण करते चिकित्सक।

मुरैना. जिला जेल में जिन कैदियों की पिटाई की गई, उन्हें पूरे 24 घण्टे बाद मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि न्यायालय ने इस आशय का आदेश घटना के कुछ समय बाद ही जारी कर दिया था। आदेश की प्रति भी शाम छह बजे जिला जेल में पहुंचा दी गई थी। संभवत: कैदियों को इसलिए देरी से अस्पताल भेजा गया, ताकि उनके शरीर पर आई चोटें मेडिकल परीक्षण के दौरान पता न चलें।
जेल में बंद कैदी खिल्लो उर्फ रमाकांत राजौरिया, गौरव, भूपेश, भूरा व छोटू की मारपीट का मामला शनिवार की सुबह सामने आया था। घटना के कुछ समय बाद ही अभिभाषक राकेश पाराशर द्वारा कैदियों की ओर से न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहा गया था कि जेल प्रबंधन की कुछ कैदियों से सांठगांठ है। इन कैदियों को वहां अनाधिकृत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और इनके माध्यम से अन्य बंदियों से वसूली भी कराई जाती है। जो कैदी इस मनमानी का विरोध करते हैं, उन्हें प्रताडि़त किया जाता है। शनिवार की सुबह 10-11 बजे के बीच रमाकांत उर्फ खिल्लो, गौरव, भूपेश, भूरा, छोटू की मारपीट भी इसीलिए की गई। आवेदन पर गौर करने के बाद जेएमएफसी विशाल शर्मा ने कैदियों का मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश जारी किया। आदेश शनिवार की शाम को ही जेल प्रबंधन तक पहुंचा भी दिया गया। इसके बावजूद कैदियों को मेडिकल परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया। घटना के पूरे 24 घण्टे बाद रविवार को सुबह 11 बजे कैदियों को जिला अस्पताल ले जाया गया। जिस समय कैदी अस्पताल पहुंचे, उस वक्त तक कोर्ट के आदेश को भी जिला जेल पहुंचे लगभग १७ घंटे बीत चुके थे। अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने उनका परीक्षण किया। मेडिकल परीक्षण में देरी पर कैदियों के परिजन का कहना था कि जेल प्रबंधन ने जानबूझकर इस काम में देरी की है, क्योंकि अधिक समय बीत जाने पर चोट के निशान कम हो जाते हैं अथवा दिखाई नहीं देते।
बंद कमरे में हुआ परीक्षण
जिला अस्पताल में कैदियों का मेडिकल परीक्षण बंद कमरे में किया गया। सभी कैदी पुलिस बल की कस्टडी में अस्पताल पहुंचे थे। उनके पहुंचते ही इमरजेंसी ड्यूटी कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया। इस रवैये पर कैदियों के परिजन ने असंतोष जाहिर किया। उनका कहना था कि मेडिकल परीक्षण के दौरान इस तरह की गोपनीयता आमतौर पर नहीं बरती जाती। उन्होंने कहा कि एक-दो लोगों को अंदरूनी चोट है, लेकिन उनका एक्स-रे कराने की जरूरत भी महसूस नहीं की गई।
डॉक्टर बोले, कुछ बता नहीं सकते
कैदियों के मेडिकल परीक्षण को लेकर इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक का रवैया भी सहज नहीं दिखा। जब उनसे कैदियों की मारपीट के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें तो एक कैदी के शरीर पर चोट नजर आई है। इससे अधिक वे कुछ नहीं बता सकते। जब उनसे पूछा गया कि क्या पिटाई के बाद मेडिकल परीक्षण में देरी होने से चोट की स्थिति पर कोई फर्क पड़ता है तो उन्होंने कहा कि इस बारे में तो विशेषज्ञ चिकित्सक से पूछा जाना चाहिए।
कथन
हमें तो कोर्ट का आदेश रविवार को सुबह सात बजे मिला। इसके तुरंत बाद हमने रक्षित निरीक्षक से बात करके पुलि बल बुलवाया और कैदियों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया। जब किसी के साथ मारपीट हुई ही नहीं तो हमें किस बात का डर।
बाबूलाल शुक्ला, उप अधीक्षक, जिला जेल