
गुरुदेव आचार्य विपुलसागर महाराज के अवतरण दिवस समारोह में बड़े जैन मंदिर मुरैना में जैनाचार्य निर्भय सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया
मुरैना. गुरु के बिना जीवन अंधकारमय होता है। सांसारिक जीवन में ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक जीवन में भी गुरु का अत्यधिक महत्व है। किसी ने ठीक ही कहा है ‘जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं’। आध्यात्मक गुरु केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि शिष्य के अंतरंग को शुद्ध एवं निर्मल कर उसे आत्मज्ञानी बनाता है। उक्त उदगार जैनाचार्य निर्भय सागर महाराज ने गुरुदेव आचार्य विपुसागर महाराज के अवतरण दिवस समारोह में बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्य ने कहा कि जैन दर्शन में गुरु को अज्ञान के अंधकार से निकालकर मोक्ष मार्ग दिखाने वाला, परम उपकारी और सच्चा मार्गदर्शक बताया गया है। वे निग्रंथ साधु होते हैं जो विषयों से विरक्त होकर ज्ञान, ध्यान और तप में लीन रहते हैं। गुरु ही आत्मा के स्वरूप को उजागर करते हैं, धर्म के संस्कार देते हैं, और कर्मों के बंधनों को तोडकऱ भवसागर से पार उतारते हैं। गुरु ही अज्ञानी जीव को सम्यक दर्शन और सम्यक ज्ञान प्रदान कर आत्मा का बोध कराते हैं। गुरु ही बताते हैं कि सच्चा सुख सांसारिक भोगों में नहीं, बल्कि संयम और त्याग में है। गुरु के उपदेशो से ही शिष्य के मन में वैराग्य उत्पन्न होता है, जिससे वह तप-संयम अपनाकर कर्मों की निर्जरा करता है। गुरु ही शिष्य को हिंसक प्रवृत्तियों से बचाकर अहिंसा, संयम और तप के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं । निग्र्रथ साधु ही सच्चे गुरु होते है जो मोक्ष मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करते है और अपने शिष्यों को संयम पथ पर बढऩे के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता, न ही।
आचार्य निर्भय सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में आचार्य पद प्रदाता गुरुदेव आचार्य विपुल सागर महाराज के 93वें अवतरण दिवस के अवसर पर प्रात: श्री जी के अभिषेक, शांतिधारा के पश्चात आचार्य विधान का आयोजन किया गया। गुरुदेव आचार्य विपुल सागर महाराज का अष्ट दृव्य से पूजन किया गया।
मंचासीन गुरुदेव एवं मुनि सुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज का निर्मल जैन भंडारी परिवार द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया। श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा आचार्य संघ को शास्त्र भेंट किए गए। कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री सिहौनिया एवं प्रतिष्ठाचार्य अजय भैया दमोह द्वारा किया गया।
Published on:
29 Mar 2026 02:15 pm
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