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पीएम आवासों में बिजली, पानी, सड़क सुविधाएं नहीं, निर्माण की भी कछुआ

अपनी छत का सपना साकार होने पर प्रधानमंत्री आवासों में रहने पहुंचे हितग्राहियों की खुशियां जल्द ही काफूर हो गईं। यहां न तो व्यवस्थित और पक्की सड़कें और न ही पेयजल और बिजली आपूर्ति की समुचित व्यवस्था है।

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पीएम आवास-मुरैना।

-पीएम आवास पानी के लिए भटकते लोग।

रवींद्र सिंह कुशवाह, मुरैना. बिजली तीन-तीन दिन गुल रहती है और ऐसे में पीने के पानी के लिए लोगों को बर्तन लेकर निर्माण एजेंसी के बने अस्थाई टैंकों से पानी का इंतजाम करना पड़ता है।
एबी रोड पर घरौना हनुमान मंदिर के सामने अतरसूमा मौजे में निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास परियोजना पर चार साल से काम चल रहा है। कोविड काल में 12 सितंबर2020 को 256 हितग्राहियों को आनन-फानन में चाबी देकर प्रवेश करवा दिया गया। इस साल भी ९६ लोगों को आवास आवंटित कर दिए गए हैं। लेकिन समस्याओं की वजह से ज्यादा लोग वहां पहुंच नहीं रहे हैं। करीब साढ़े तीन सौ हितग्राहियों को आवास आवंटित हुए हैं लेकिन 200 के करीब ही परिवार वहां रहने पहुंच पाए हैं। इन परिवारों का भी अनुभव अच्छा नहीं है। सड़कें कच्ची होने से तो लोग परेशान थे ही अब वहां बरसात के दिनों में लोगों को परेशानी हो रही है। सबसे बड़ा संकट बिजली का है। तीन-तीन दिन आपूर्ति बंद रहने से लोगों के घरों की पानी की टंकियां खाली हो जाती हैं। उसके बाद आवासीय परिसर में खाली बर्तन लेकर पानी के लिए भटकते हैं। निर्माण एजेंसी ने कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य के लिए पानी एकत्र करने जमीन के अंदर टंकियां बनवाई हैं, लोग यहीं से पानी का इंतजाम करते हैं। बिजली न होने पर जनरेटर से पानी निकाला जाता है। इस दौरान उनके टैंकर भरने तक तो लोगों को पानी मिलता है, उसके बाद फिर समस्या हो जाती है। बिजली संकट की वजह तकनीकी है। शहर फीडर की बिजली कारखानों को तो क्वारी नदी के किनारे तक दी जा रही है, लेकिन पीएम आवास परिसर को ग्रामीण फीडर से जोडऩे से अक्सर बिजली संकट बना रहता है।
प्रदर्शन आंदोलन तक कर चुके हैं लोग
प्रधानमंत्री आवासों में पहुंचे लोगों का कहना है कि पानी का पंप संचालित करने के लिए तीन फेज वाला कनेक्शन नहीं है। निर्माण एजेंसी के कनेक्शन से पंप चलाया जाता है तो अक्सर समस्या आती रहती है। बिजली संकट पर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। हितग्राहियों ने कार्यालय में जाकर पता किया तो बताया गया है कि वहां तीन फेज वाला कनेक्शन स्वीकृत ही नहीं है।
सीवर लाइन जाम, परिसर में गंदगी व बदबू हो रही
प्रधानमंत्री आवासीय परिसर में सीवर लाइन भी कई जगह जाम है। गंदा पानी और गंदगी परिसर में जमा होने से बदबू आती है। लेकिन नगर निगम ने यहां सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया है। लोग कई बार शिकायत कर चुके, प्रदर्शन-आंदोलन कर चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन समस्याओं ेनिदान पर गंभीर नहीं है। शहर से करीब चार किमी दूर होने से वे बाजार की सुविधाओं का भी लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन समस्याओं के चलते आवास आवंटन के बावजूद करीब 100 परिवार वहां रहने नहीं पहुंच रहे हैं।
अधिकारियों का ऐसा है रवैया
-नगर निगम के आयुक्त संजीव कुमार जैन का नंबर किसी अन्य नंबर पर अग्रेषित है। जबकि प्रभारी एई केके शर्मा कभी फोन नहीं उठाते। व्हाट्स कॉल करने पर भी संदेश करते हैं कि अभी बात नहीं कर सकते, व्हाट्स एप करो, उसका जवाब नहीं आता। अधिकारी भी उन्हें संरक्षण दे रहे हैं।
फैक्ट-
1176 आवास निर्माणाधीन हैं अतरसूमा मौजे में।
356 के करीब आवास आवंटित हो चुके हैं अब तक।
200 के करीब परिवार रहने पहुंच गए हैं परिसर में।
3-3 दिन तक बिजली और पेयजल संकट से जूझते हैं लोग।
4 किमी के करीब दूर से शहर से पीएम आवास परियोजना।
कथन-
पीएम आवास में सुविधा की उम्मीद से आए थे, लेकिन यहां समस्याएं अधिक हैं। पानी, बिजली और सड़क समस्या के चलते बहुत परेशानी होती है।
पप्पू माहौर, हितग्राही, पीएम आवास
-हमने सोचा था अपने घर में सुकून से रहेंगे, लेकिन यहां आकर पता चला कि मूलभूत सुविधाएं ही समुचित नहीं हैं। अक्सर बिजली और पानी संकट रहता है। सफाई नहीं होती, बरसात में कच्ची सड़कों पर कीचड़ हो जाती है।
मुकेश खत्री, हितग्राही, पीएम आवास
-पानी की मोटर खराब थी, उसे सुधरवा दिया गया है। पानी की समस्या हल हो जाएगी। फीडर की समस्या भी हल करवाएंगे।
अमरनाथ व्यास, एई, ननि, मुरैना।