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मरीजों को गुमराह कर रहे पैथोलॉजी संचालक

बुखार पीडि़त व्यक्ति को एक ने डेंगू पॉजिटिव और तीन ने बताया निगेटिव स्वास्थ्य महकमा नहीं करता इन लैबों की जांच

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मुरैना. पैथोलॉजी संचालकों द्वारा जांच के नाम पर मरीजों से मनमाना पैसा ऐंठा जा रहा है। लैब जिस जांच के लिए अधिकृत नहीं हैं फिर भी पैसों के लालच में उस जांच को कर रहे हैं और मनगढ़ंत रिपोर्ट देकर मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। एक बुखार पीडि़त को तीन जगह निगेटिव रिपोर्ट दी गई, उसको रोशन कुटी में स्थित पैथोलॉजी संचालक द्वारा डेंगू पॉजिटिव बताकर भर्ती करने पर मजबूर कर दिया। विडंवना यह है कि स्वास्थ्य महकमां इन लैबों की जांच नहीं करता, इसलिए ये मनमानी कर रहे हैं।
ब्राम्हण अंतरराष्ट्रीय युवा संगठन के संभागीय संयोजक अनिल पाठक ने बताया कि मेरा स्वास्थ्य खराब हुआ तो एक सप्ताह पूर्व मैंने जिला अस्पताल में जांच कराई। वहां मलेरिया रहित डेंगू निगेटिव आया। जबकि रोशन कुटी में स्थित पैथोलॉजी पर जांच करवाई तो डेंगू पॉजिटिव बताया जिससे मैं घबरा गया और पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। वहां फिर डेंगू की जांच कराई तो रिपोर्ट में डेंगू निगेटिव आया। यही स्थिति प्लेटलेट्स की है। एक ही दिन में प्लेटलेटस की संख्या में अलग-अलग जांच कराने पर एक लाख तक का अंतर आया। इससे लगता है कि पैथोलॉजी संचालक जांचों के नाम पर मरीजों से मनमाना शुल्क वसूल कर मनमानी जांच रिपोर्ट दे रहे हैं। इसके चलते मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों से इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि डेंगू की वास्तविक जांच मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में संभव है। यहां जो लैब वाले कर रहे हैं, वह किट के आधार पर कर रहे हैं, जिससे सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है कनफर्म नहीं। किट से जांच उपरांत आने वाली डेंगू पॉजिटिव मरीजों की रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज में पचास फीसदी निगेटिव आती है। यहीं स्थिति प्लेटलेट्स की है। इनकी काउंटिंग माइक्रोस्कोप से की जाती है, उससे अधिक कठिनाई आती है इसलिए लैब संचालक मशीन से काउंट करके प्लेटलेट्स की संख्या की रिपोर्ट मरीज को दे रहे हैं। मशीन में कभी संख्या प्रोपर नहीं आती। अगर प्लेटलेट्स की वास्तविक स्थिति देखनी है तो माइक्रोस्कोप से ही मिल सकती है। इसका उपयोग कभी कभी ही लैब संचालक करते हैं। लैब संचालक की मनमानी के चलते लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रही है साथ ही उनकी जेब पर भी अतिरिक्त डाका डाला जा रहा है।
कथन
डेंगू की जांच के लिए किट एलाऊ ही नहीं है। अगर कोई लैब संचालक किट से डेंगू की जांच कर रहा है तो गलत कर रहा है। टीम बनाकर लैबों की जांच कराई जाएगी। अगर अनियमितता मिली तो संबंधित लैब संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. प्रदीप मिश्रा, सीएमएचओ, मुरैना