13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकारी हैंडपंपों में निजी मोटरें, सार्वजनिक उपयोग बंद

अभियान : अतिक्रमण मुक्त हों सार्वजनिक पेयजल स्रोतजिलेभर में 15 हजार के करीब सरकारी हैंडपंप, शहर में ही डेढ़ हजार के करीब, 200 से ज्यादा पर कब्जे

2 min read
Google source verification
सरकारी हैंडपंपों में निजी मोटरें, सार्वजनिक उपयोग बंद

सरकारी हैंडपंप में निजी मोटर।

मुरैना. सार्वजनिक और सरकारी पेयजल स्रोतों पर निजी लोगों के कब्जों से सामान्य जन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिन हैंडपंपों का उपयोग सार्वजनिक तौर से होता था, अब उन्हें प्राइवेट तौर पर उपयोग में लिया जा रहा है, लेकिन इसे देखने-सुनने वाला कोई नहीं है। जिलेभर में 16 हजार के करीब सरकारी हैंडपंप हैं, लेकिन 200 से ज्यादा पर निजी लोगों ने अपनी मोटर लगा रखी हैं और सार्वजनिक उपयोग बंद कर दिया है।

नगर निगम क्षेत्र में भी 1500 के करीब सार्वजनिक हैंडपंप हैं और कई जगह तो 100 मीटर के दायरे में दो से तीन तक हैंडपंप स्थापित हैं। सार्वजनिक नल जल आपूर्ति भी है। इसके बावजूद लोगों ने हैंडपंपों को निजी कब्जे में ले लिया है। हालांकि यह हैंडपंप सार्वजनिक होने से सड़कों के किनारे ही खुली जगह में स्थापित हैं, लेकिन उनका उपयोग कोई आम आदमी नहीं कर पा रहा है। नगर निगम का पूरा अमला शहर में कभी नाली साफ करने और कभी झाड़ू करने के नाम पर जाता है, लेकिन कभी इसकी रिपोर्ट नहीं की जाती है। व्यावहारिक रूप से 500 लोगों की आबादी पर एक हैंडपंप लगाया जाता है, लेकिन नगरीय क्षेत्र में रसूख के कारण मानकों को ताक पर रख दिया है। फाटक बाहर, एबी रोड के उस पार के अलावा मुख्य सड़कों से सटकर बसे मोहल्लों में शहर में ही आधा सैकड़ा के करीब सार्वजनिक हैंडपंपों पर कब्जे किए गए हैं। कई बार गर्मी में लोग हैंडपंप से पानी पीना चाहते हैं, लेकिन नहीं मिल पाता। ग्रामीण क्षेत्रों में भी 150 से अधिक सार्वजनिक हैंडपंपों पर लोगों के कब्जे हैं और वे अपनी मोटरें डालकर पानी बेच रहे हैं। सुमावली में तो लोग सार्वजनिक तौर से शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। जब शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती तो लोग थककर घर बैठ जाते हैं। सुमावली में तो एक-एक घर में पीने के पानी के नाम पर लोगों को 300-400 रुपए प्रतिमाह खर्च करने पड़ते हैं। जो लोग इयह राशि देने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें दूर खेतों से पानी ढोकर लाना पड़ता है। यहां तक कि बच्चों को भी दिन भर पानी ढोना पड़ता है।

कभी पंचायत व विभाग से नहीं होती कार्रवाई


सार्वजनिक पेयजल स्रोतों पर निजी लोगों के कब्जोंं को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। कभी भी इस बात का सर्वे नहीं कराया जाता कि जो सरकारी हैंडपंप लगवाए गए हैं, उनकी वर्तमान हालत क्या है। जब शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती तो सामान्य तौर पर इसे नोटिस करना तो दूर की बात है।