निर्देंशक रेमो डीसूजा का आज इंडस्ट्री में किसी पहचान की जरूरत नहीं है। उन्होंने जहां कोरियोग्राफी में अपना नाम कमाया है, वहीं बतौर निर्देशन उनका काम सराहनीय है। उन्होंने इस सुपर हीरो वाली फिल्म में काफी कुछ नया करने की पूरी कोशिश की है और एक्शन में भी कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। उन्होंने इसमें कॉमेडी के साथ एक्शन का जबरदस्त तड़का तो जरूर लगाया, लेकिन कहीं-कहीं थोड़ी भारी पड़ती है। अपने नायाब निर्देशन के बूते उन्होंने कुछ अलग जरूर पेश किया है, इसीलिए वे दर्शकों की वाहवाही लूटने में सफल रहे। फिल्म में बच्चों के टेस्ट को ध्यान में रखा गया है, जबकि बड़ों की उम्मीदों पर कुछ कम ही खरी साबित हुई। बहरहाल, 'रूह काली है मेरी...' और 'सुपर हीरो वो है जो अच्छाई के लिए लड़े...' जैसे कई डायलॉग्स काबिल-ए-तारीफ रहे। इसके अलावा फिल्म का गीत-संगीत (सचिन-जिगर) तो ऑडियंस के दिल को छूता हुआ महसूस हुआ, लेकिन गाने (मनशील गुजराल, रफ्तार, तनिष्का, आतिफ असलम, सुमेधा करमाहे, सचिन, जिगर, वायु, विशाल डडलानी, दिव्या कुमार, असीस कौर) की तुलना में कुछ एक मायनों में थोड़ी कमी सी फील हुई।