26/11 Mumbai Terror Attack: भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा, हम मुंबई में हुए भयानक आतंकी हमले के 14 साल पूरे होने की बरसी देख रहे हैं। इजराइल भारत के साथ है और दोनों देश आतंक के शिकार हैं।
2008 Mumbai Terror Attack: आज मुंबई आतंकी हमले की 14वीं बरसी है। देश की आर्थिक राजधानी में 26 नवंबर 2008 को हुए इस हमले ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। तब से भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर युद्ध छेड़ रखा है। आतंकवाद के खात्मे के लिए कई शक्तिशाली देश भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े है।
भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा, हम मुंबई में हुए भयानक आतंकी हमले के 14 साल पूरे होने की बरसी देख रहे हैं। इजराइल भारत के साथ है और दोनों देश आतंक के शिकार हैं। हम आतंकवाद और इसके वित्तपोषण से निपटने के लिए भारत द्वारा बुलाए गए दो अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की सराहना करते हैं। यह भी पढ़े-मुंबई हमले की 14वीं बरसी आज, विदेश मंत्री जयशंकर बोले- दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पाकिस्तानी आतंकियों के इस हमले में अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को आज पुलिस आयुक्त कार्यालय में श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर शिंदे के साथ उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस भी मौजूद थे।
इससे पहले दिन में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा, आतंकवाद से मानवता को खतरा है। जिन लोगों ने इस हमले की योजना बनाई उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए। हम दुनिया भर में आतंकवाद के हर पीड़ित के प्रति संवेदनाएं हैं।
मीडिया से बात करते हुए जयशंकर ने कहा "इतने वर्षों बाद भी जिन लोगों ने मुंबई हमले की योजना बनाई थी, उन्हें सजा नहीं मिली है। यह ऐसा मुद्दा है जिसे हम अत्यधिक महत्व देते हैं। हम बहुत से ऐसे देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं जिनके नागरिकों ने इस आतंकी हमले में जान गंवाईं हैं।"
उल्लेखनीय है कि 10 पाकिस्तानी आतंकवादी 26 नवंबर 2008 को समुद्री मार्ग से मुंबई पहुंचे थे और उनके हमले में 18 सुरक्षाकर्मियों समेत 166 मारे गए थे तथा कई अन्य लोग घायल हुए थे। इसके अलावा करोड़ों रुपये की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा था।
यह हमला 26 नवंबर को शुरू हुआ था और 29 नवंबर तक चला था। इस दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्राइडेंट, ताजमहल पैलेस एंड टॉवर, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल, नरीमन सामुदायिक केंद्र जैसे स्थानों को निशाना बनाया गया था। अजमल कसाब एकमात्र आतंकवादी था जिसे जिंदा पकड़ा गया था। उसे चार साल बाद 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई थी।