
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे
Maharashtra Border Issue: महाराष्ट्र के नासिक, सोलापुर और बुलढाणा जिले के कम से कम 70 गांवों ने महाराष्ट्र से अलग होकर अपने नजदीकी राज्य से जुड़ने की इच्छा जताई है। अकेले नासिक के सुरगना तालुका के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित कम से कम 55 गांवों और बस्तियों के लोगों ने उनके मुद्दों का समाधान करने या फिर उनका विलय गुजरात में करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन उनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है और उन्हें लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीँ, गुजरात में विलय की धमकी देने के बाद मंत्री दादा भुसे ने सीमावर्ती क्षेत्रों के सर्वांगीण समावेशी विकास का आश्वासन दिया है। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर नहीं थम रहा हंगामा, बस सेवा फिर बंद, जानें 5 बड़ी अपडेट
नासिक के 55 गांव अलग होने के लिए तैयार
नासिक जिले के पालक मंत्री भूसे ने मंगलवार को एक जनसभा में आंदोलनकारियों से कहा कि महाराष्ट्र में सामाजिक न्याय और विकास की विरासत है और इसके लिए पूरे देश में राज्य की पहचान है। मंत्री ने कहा, ‘‘सुरगना तालुका में गुजरात सीमा पर आदिवासी गांवों और ‘पड़ा (छोटी बस्तियों)’ के सर्वांगीण-समावेशी विकास के लिए प्राथमिकता के साथ योजना तैयार की जाएगी और एक समयबद्ध कार्यक्रम चलाया जाएगा।’’
सोलापुर के 11 ग्राम पंचायत शिंदे सरकार से खफा
इससे पहले महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की अक्कलकोट तहसील (Akkalkot) के 11 ग्राम पंचायतों ने भी जिला प्रशासन से उन्हें बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने या फिर पड़ोसी राज्य कर्नाटक के साथ विलय करने की अनुमति देने के लिए कहा है। यहां के लोगों ने जिलाधिकारी से बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और अच्छी सड़कों की समस्या का समाधान करने के लिए कहा है।
बुलढाणा जिले के 4 गांव नाराज
वहीँ, मध्य प्रदेश की सीमा पर मौजूद राज्य के बुलढाणा जिले के 4 गांवों के नागरिकों ने बुनियादी सुविधाएं न मिलने के कारण मध्य प्रदेश में शामिल होने का फैसला किया है। वर्षों से गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर यह निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रशासन को निवेदन पत्र भी सौंपा गया है।
Published on:
07 Dec 2022 06:22 pm
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