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आदिवासियों का होगा पुनर्वसन, म्हाडा प्रोजेक्ट में लगेंगे 10 साल

विकास: आजादी के 70 साल बाद संजय गांधी नेशनल पार्क के आदिवासियों को मिलेगा नया आशियाना

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आदिवासियों का होगा पुनर्वसन, म्हाडा प्रोजेक्ट में लगेंगे 10 साल

आदिवासियों का होगा पुनर्वसन, म्हाडा प्रोजेक्ट में लगेंगे 10 साल

मुंबई. देश की आजादी के 71 साल बाद महामुंबई स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क के आदिवासियों का पुनर्वसन किया जाएगा। जंगल में काम करने वाले आदिवासियों के झोपड़ों समेत करीब 29 हजार स्लम वासियों को फिर से बसाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार से अनुमति ले ली है। म्हाडा अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में 10 वर्ष लगाएगा, जिसके बाद वर्षों से झोपड़ों और स्लम में रहने को मजबूर लोगों को पक्के घरों में रहने का मौका मिलेगा। आदिवासी पाडे, वन विभाग की जमीन पर बसे झोपड़ों और कोलीवाडा के झोपड़ों का जल्द ही पुनर्वसन शुरू हो जाएगा। 60-70 वर्षों से झोपड़ों में रहने वाले आदिवासियों की अब जल्दी ही किस्मत खुलने वाली है और अब उन्हें भी अच्छी जिंदगी से जीवन व्यापन करने का अवसर मिलेगा। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 90 एकड़ जमीन ले ली गई है, जिसमें लोगों को रिहैब करने की प्लानिंग म्हाडा ने पूर्ण कर ली है।

पिछले साल हुई थी चर्चा
अक्टूबर 2018 में विधान परिषद में शिवसेना की नीलम गोरहे, अनिल परब, भाजपा के प्रवीण दरेकर, कांग्रेस के भाई जगताप, हरीभाऊ राठोड, विद्या चव्हाण समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले पर चर्चा की थी। इसमें निर्णय हुआ था कि महामुंबई के बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क में वन विभाग की जमीन पर एसआरए योजना लागू नहीं हो सकती, जबकि उनके लिए जमीन उपलब्ध कराए जाने का विकल्प आया था। म्हाडा की ओर से वन विभाग की करीब 90 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की है, जिसमेें आदि-वासियों और स्लम में रह रहे लोगों को बसाने का काम किया जाएगा।

दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं मुख्यमंत्री...

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पात्र अतिक्रमणधारकों के पुनर्वसन से संबधित विविध समस्याओं का महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपर मुख्य सचिव प्रविण परदेशी, म्हाडा के व्यवस्थापकीय संचालक मिलिंद म्हैसकर, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव नितीन करीर, वन विभाग के सचिव विकास खारगे समेत संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारी के साथ विस्तार में विचार-विमर्श भी कर चुके हैं। साथ ही पुनर्वसन के लिए पात्र झोपड़पट्टीधारक व आदिवासी बस्ती की परिवारों की सूची अपडेट करने और इस परिपूर्ण सूची को म्हाडा की ओर हस्तांतरित करने के दिशा-निर्देश भी मुख्यमंत्री संबंधित अफसरों को जारी कर चुके हैं।

सुनियोजित तरीके से शुरू होगा काम
पिछले कई वर्षों से झोपड़ों में रहने को मजबूर लोगों को अब जल्द ही सरकार की ओर से पक्का मकानों में रहने का मौका मिलेगा, जिसमें लगभग 10 वर्ष का समय लगेगा। इसके लिए केंद्र सरकार से भी परमीशन ली जा चुकी है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट को अविलंब जल्द ही सुनियोजित तरीके से शुरू किया जाएगा।
मधु चव्हाण, सभापति, म्हाडा