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वेदांत प्रोजेक्ट के बाद अब ‘PhonePe’ का रजिस्टर्ड ऑफिस भी महाराष्ट्र से होगा शिफ्ट? कांग्रेस ने शिंदे सरकार को घेरा

महाराष्ट्र में शिंदे सरकार को कांग्रेस ने एक नए मुद्दे के साथ घेरना शुरू किया है। दरअसल यूपीआई पेमेंट कंपनी फोनपे अपने रजिस्टर्ड ऑफिस को महाराष्ट्र से कर्नाटक में स्थानांतरित कर रही है। इससे पहले भी वेदांत प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र से गुजरात शिफ्ट करने के मामले में विपक्ष ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला था।

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PhonePe

महाराष्ट्र में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पहले ही विपक्ष गुजरात को 20 अरब डॉलर की वेदांत प्रोजेक्ट को खोने के लिए शिंदे सरकार पर हमला कर रहा है, इस बीच विपक्ष को एक और मामला मिल गया जब यह स्पष्ट हो गया कि फोनपे (PhonePe) अपने रजिस्टर्ड ऑफिस को महाराष्ट्र से कर्नाटक में शिफ्ट कर रहा है। फोनपे वॉलमार्ट के स्वामित्व वाला 690 करोड़ का यूपीआई ऐप है जिसने ये एलान किया है। फोनपे के रजिस्टर्ड ऑफिस को महाराष्ट्र से कर्नाटक में शिफ्ट करने से वहां स्थानीय कर फायदा का दावा किया जा सकता है। महाराष्ट्र के लिए ये संभावित राजस्व नुकसान हो सकता है।

इस संबंध में मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष भाई जगताप ने कहा कि वेदांता प्रोजेक्ट को बनाए रखने और बल्क ड्रग पार्क को रायगढ़ में लाने में असफल रहने के बाद, फोनपे भी महाराष्ट्र से बाहर जा रहा है। भाई जगताप ने शिंदे सरकार पर महाराष्ट्र के हित में काम करने की जगह आदेश लेने के लिए दिल्ली भागने का गंभीर आरोप लगाया है। यह भी पढ़ें: Maharashtra News: इस जिले में शराब पीने के मामले में महिलाएं सबसे आगे, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य रिपोर्ट से हुआ खुलासा

बता दें कि शरद पवार के पोते और एनसीपी विधायक रोहित पवार ने कहा कि राज्य की कीमत पर महत्वपूर्ण परियोजनाओं को एक-एक करके पड़ोसी राज्यों में ट्रांसफर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बात को जानने के बावजूद कि महाराष्ट्र देश के खजाने में सबसे ज्यादा योगदान देता है, इसकी युवा आबादी को जॉब से वंचित किया जा रहा था।

शिंदे गुट के एमएलए ने दिया जवाब: इस मामले में शिंदे खेमे के विधायक नरेश म्हस्के ने विपक्ष की बातों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी द्वारा रजिस्टर्ड ऑफिस को ट्रांसफर करना निवेश का नुकसान नहीं है। यह कंपनी का केवल तकनीकी कदम है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन को इस पर बोलने का कोई हक नहीं है क्योंकि एमवीए ने सत्ता में रहते हुए महाराष्ट्र में कई नई परियोजनाओं को लाने के लिए शायद ही कोई कदम उठाए हो।