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शहद से बदलेगी मांघर गांव की सूरत, 80 प्रतिशत लोग पालते हैं मधुमक्खी

पहली बार: घने जंगल में मधुमक्खियों के अनुकूल वातावरणहिल स्टेशन महाबलेश्वर स्ट्राबेरी की खेती के लिए मशहूर  

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शहद से बदलेगी मांघर गांव की सूरत, 80 प्रतिशत लोग पालते हैं मधुमक्खी

शहद से बदलेगी मांघर गांव की सूरत, 80 प्रतिशत लोग पालते हैं मधुमक्खी

मुंबई. महाराष्ट्र के सतारा जिले satara में स्थित खूबसूरत हिल स्टेशन Mahabaleshwar महाबलेश्वर Strawberry स्ट्राबेरी Maharashtra की खेती के लिए मशहूर है। यहां की सुरम्य पहाड़ी वादियों में बसे और घने जंगलों से घिरे मांघर गांव की सूरत भी जल्द ही बदलेगी। इस गांव को जल्दी ही मधाचे गांव Manghar village या हनी विलेज के रूप में पहचान मिलेगी। यह दर्जा हासिल करने वाला यह देश का पहला गांव होगा। वैसे मंघार गांव के लिए मधुमक्खी Appearanc पालन नया नहीं है। यहां 100 परिवार रहते हैं। इनमें 80 की आजीविका शहद honey से चलती है। बागवानी gardening व पर्यटन को प्रोत्साहन देने से जुड़ी महाराष्ट्र सरकार की योजना को राज्य खादी Khadi ग्रामोद्योग बोर्ड अमली रूप दे रहा है। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशु सिन्हा ने बताया कि आसपास के दूसरे गांव भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किए जाएंगे। सरकार के साथ पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि महाबलेश्वर आने वाले सैलानी नैसर्गिक तरीके से हासिल मध के सेवन व मधुमक्खी पालन का तरीका देखने मंघार गांव जरूर जाएंगे।

सालाना 35 हजार किलो शहद
महाबलेश्वर से आठ किमी दूर मंघार गांव के पास घने जंगल हैं। बारहों महीने पेड़ों-झाडिय़ों में फूल लगे रहते हैं। यहां के वातावरण मधुमक्खी पालन के अनुकूल है। स्थानीय लोग people पहले से ही प्राकृतिक तरीके से शहद हासिल करते हैं। महाराष्ट्र में हर साल 1.25 लाख किलो शहद उत्पादन होता है। इसमें 35 हजार किलो का योगदान मंघार और इसके आसपास के गांवों के लोग करते हैं। जंगल में जामुन, लीची, दालचीनी, मल्बरी, हिरडा आदि पौधे भी लगाए गए हैं।

स्वरोजगार के लिए ट्रेनिंग
शहद का उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है। गांव के 80 परिवारों को सब्सिडी पर बी-बॉक्स मुहैया कराए गए हैं। जल्दी ही यहां बी ब्रीडिंग सेंटर भी खुलेगा। सिन्हा ने बताया कि हम साबुन, शैंपू व तेल Oil बनाने के लिए गांव के लोगों को प्रशिक्षित करेंगे।

गांव के नाम ब्रांड
शहद की बिक्री हनी विलेज मांघर के नाम पर की जाएगी। यहां आने वाले पर्यटकों को नेचुरल हनी मिलेगी। इतना ही नहीं सैलानी मधुमक्खी पालन और शहद हासिल करने के तकनीक भी देख-समझ सकते हैं। पर्यटन विभाग केएक अधिकारी ने बताया कि हर साल 25 लाख सैलानी महाबलेश्वर आते हैं। इनमें से 10 प्रतिशत ने भी मांघर का रुख किया तो इस गांव की सूरत बदलते देर नहीं लगेगी। ग्राम टूरिज्म tourism योजना के तहत पर्यटकों की आवभगत के क्षेत्र में स्थानीय लोगों को रोजगार employment मिलेगा।