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अरुण लाल की रिपोर्ट...
(मुंबई): कहते हैं मुंबई कभी किसी के लिए नहीं रुकती। हर कोई अपनी दुनिया को सजाने-संवारने के लिए भागा जा रहा है। पर, इसी मुंबई में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने दूसरों के जीवन को सुंदर बनाया। हेमलता तिवारी इन्हीं में एक हैं। इन्होंने 'स्वरधारा की नींव रख हमेशा तिरस्कार पाने वाले भिखारियों का बैंड बना कर इनको आत्मसम्मान से जीना सिखाया। आज हेमलता और उनकी टीम अनवरत लगी है बिना थके, बिना रुके।
हेमलता किसी अमीर घर की युवती नहीं हैं। पिता रिक्शा चलाकर जीवन यापन करते थे, पर बच्चों को असमय ही अकेला छोड़ वे दुनिया को विदा कह गए। हेमलता के छोटे भाई ने रिक्शा चलाकर परिवार चलाना शुरू किया। घर के अन्य सदस्य भी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटे हुए थे।
हेमलता बताती हैं, "वह एक मई का दिन था, मैं अंधेरी लोकल से चर्चगेट की तरफ जा रही थी। तभी मैंने दो लोगों को गाते हुए सुना। इनकी आवाज इतनी मधुर थी कि पल भर को मेरा मन आनंद से भर उठा। पर, यह दोनों गाकर भीख मांग रहे थे, कुछ लोग एक दो रुपए दे रहे थे, तो कुछ दुत्कार रहे थे। मैं चर्चगेट पहुंची, तो देखा कि वहां स्टेज पर कुछ कलाकार प्रस्तुति दे रहे थे। लोग तालियां बजा कर उनका सम्मान कर रहे थे। मेरा मन कहीं अटक गया, "एक को सम्मान, दूसरे को तिरस्कार!"
लोगों ने उड़ाया था मजाक
जाने कितने लोग उस दिन वहां से गुजरे, पर किसी को यह नजर नहीं आया। पर, हेमलता देर तक सोचती रहीं और तय किया कि वे इन लोगों का बैंड बनाएंगी। जब उन्होंने अपने परिवार और मित्रों से यह बात की तो लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। उन्हें कहा गया कि यह संभव नहीं है। अगर किसी तरह से यह कर भी लिया, तो कौन बुलाएगा इन भिखारियों को गाने-बजाने के लिए।
दोस्त ने दिलाई याद, छोड़ दी नौकरी
कॉलेज खत्म हुआ और हेमलता एक एनजीओ में जॉब करने लगीं। सब ठीक चल रहा था, पर कहीं-न-कहीं हेमलता के मन में बैंड बनाने का सपना पल रहा था। एक दिन कॉलेज का एक मित्र मिला जिसने पूछा, क्यों भाई क्या हुआ आपके बैंड का? फिर क्या था, हेमलता ने नौकरी छोड़ी और बैंड बनाने की तरफ बढ़ गईं ।
नहीं मानी हार
हेमलता बतातीं हैं, मैं अपने चार दोस्तों के साथ ट्रेन में गाकर जीवन-यापन करने वाले इन कलाकारों का गाना सुनकर उनसे बैंड का हिस्सा बनने का अनुरोध करती थी। कई कलाकारों ने तो हमें दुत्कार दिया। फिर भी हमने हार नहीं मानी और हम लगे रहे। आज स्वरधारा के साथ 45 कलाकार जुड़े हुए हैं, जिनमें 32 कलाकार ऐसे हैं, जो अंधे हैं। बस सफर चल पड़ा।
Published on:
05 Nov 2018 07:28 pm
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