
मराठी अनिवार्य होने पर भावुक हुए ऑटो चालक
Marathi Language Mandatory: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए एक नया और सख्त नियम लागू कर दिया है। अब चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य होगा। सरकार के फरमान के मुताबिक, चालकों को केवल मराठी बोलना ही नहीं, बल्कि उसे लिखना और समझना भी आना चाहिए। ऐसा न करने वाले चालकों के लाइसेंस और परमिट रद्द कर दिए जाएंगे। इस फैसले को लागू करने के लिए 1 मई तक का समय दिया गया है।
आपको बता दें कि सरकार के इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आए प्रवासी चालक हो रहे हैं। मुंबई की सड़कों पर सालों से ऑटो चला रहे इन चालकों का दर्द छलक पड़ा है। कई चालकों का कहना है कि वे कामचलाऊ मराठी तो बोल लेते हैं, लेकिन लिखना और पढ़ना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अगर सरकार ने यह मनमाना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर वापस अपने गांव लौट जाएंगे।
महाराष्ट्र ऑटो एंड टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष शशांक राव ने सरकार के इस फैसले को पूरी तरह अव्यावहारिक बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीखा तर्क दिया कि जब चालकों को मुंबई में 15 साल रहने जैसे पुराने और वैध नियमों के आधार पर परमिट दिए गए थे, तो अब उन पर अचानक नया नियम थोपना कानूनी रूप से गलत है। राव ने राज्य के परिवहन मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वयं एक बिल्डर हैं, तो क्या वे अपनी प्रॉपर्टी बेचते समय ग्राहकों से मराठी भाषा का प्रमाण मांगते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाषाई फरमान दरअसल गरीब ऑटो-टैक्सी चालकों को खत्म कर पूरी इंडस्ट्री को निजी कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों में सौंपने की एक सोची-समझी साजिश है।
यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर 1 मई के बाद किसी भी चालक का परमिट रद्द किया गया, तो 4 मई से पूरे महाराष्ट्र में उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम किया जाएगा। गौरतलब है कि केवल मुंबई में लगभग 5 लाख और पूरे महाराष्ट्र में 18 लाख से ज्यादा ऑटो-टैक्सी चालक हैं। अगर यह हड़ताल होती है, तो पूरे राज्य की रफ्तार थम सकती है।
Updated on:
22 Apr 2026 05:10 pm
Published on:
22 Apr 2026 05:09 pm
बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
