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आस्था : विशेषकर राजस्थानी व गुजराती समाज के श्रद्धालुओंकी रहती है भीड़

मुंबई के काशी में है 650 साल पुराना श्री भुलेश्वर मंदिर

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BHULESHWAR MANDIR

आस्था : विशेषकर राजस्थानी व गुजराती समाज के श्रद्धालुओंकी रहती है भीड़

मुंबई.

दक्षिण मुंबई के भुलेश्वर क्षेत्र को मुंबई का काशी कहा जाता है। आर्थिक राजधानी के प्रमुख व्यापारिक इस क्षेत्र में देवी-देवताओं के कुल 780 मंदिर हैं। यहां के सभी मंदिरों में सुबह शाम भक्तों आना-जाना लगा रहता है। भुलेश्वर क्षेत्र के व्यापारिक केंद्र बनने के बाद यहां के स्थानीय निवासियों का उपनगर की तरफ विस्थापन हो रहा है, जिसका असर मंदिरों में आयोजित होने वाले विभिन्न उत्सव में भी दिखता है। श्री भुलेश्वर मंदिर 650 वर्ष पुराना मंदिर है। महाशिवरात्रि पर्व पर दर्शन करने के लिए सुबह से ही इस मंदिर में लम्बी कतारें लगी रहती है।


प्राकट्य की कहानी


15 वीं सदी का श्री भुलेश्वर मंदिर मुख्य बाजार से सटा हुआ है। बाहर से काफी अजीर्ण अवस्था दिख रहे इस मंदिर का मूल मंदिर बेहद आकर्षक है। इस मंदिर की वास्तु खूबसूरत है। पौराणिक कथा के अनुसार 15 वीं सदी में इस भूभाग पर कोली समुदाय (मछली पकडऩे वाले) का प्रभुत्व था। भोला नाम के एक कोली व्यक्ति को रात में स्वप्न आया कि इस जगह पर शिवलिंग है, जिसे निकाल कर स्थापित करें। पूर्व में तालाब के पास उस स्थान पर भोला ने फावड़े से खोदना शुरू किया। उसका फावड़ा इस शिवलिंग से टकरा गया जिससे खून निकलने लगा। जब धार्मिक अनुष्ठान कराया गया तो खून निकलना बंद हो गया और वहां से दूध निकलने लगा। भोला ने तब शिवलिंग नहीं निकाला और उतने पर ही स्थापित करा दिया। बताया जाता है कि इसी वजह से इसे भुलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।


श्री भुलेश्वर मंदिर का शिवलिंग बीच में टूटा हुआ है और जमीन से थोड़ा ही बाहर निकला हुआ है। भुलेश्वर भक्त मंडल की ओर से यहां करीब 35 वर्षों से पूजा करने वाले विशम्भर महाराज ने कहा, जिस भक्त ने भी दिल से मंदिर में मन्नतें मांगी, उसकी मन्नतें पूरी हुई है। मंदिर में शीतला, लक्ष्मी, सरस्वती ,गणेश की भी मूर्तियां हैं। श्री भुलेश्वर महादेव के ठीक सामने नंदी बैल की बेहद खूबसूरत मूर्ति है जिसे आने वाला हर भक्त निहारता रहा जाता है।


श्री भुलेश्वर मंदिर की देखरेख 139 वर्षों से गौड़ सारस्वत ब्राह्मण टेम्पल ट्रस्ट करता है। महाशिवरात्रि व सावन महीने में चार पहर की पूजा भुलेश्वर भक्त मंडल व दाना बंदर व्यापारी मंडल की ओर से किया जाता है। महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए दूर दूर से भक्तगण आते हैं। श्री भुलेश्वर महादेव शिवलिंग पर जलाभिषेक के बाद भक्तों को प्रतीत होता है की जैसे साक्षात शिव के दर्शन हो गए।