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‘2029 में अकेले चुनाव लड़ सकते हैं BJP और शिवसेना’, संजय शिरसाट के बयान से महाराष्ट्र की सियासत में हलचल

Sanjay Shirsat Statement: महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने 2029 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी और शिवसेना के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की संभावना जताई है।

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मुंबई

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Imran Ansari

May 02, 2026

Sanjay Shirsat

@Sanjay Shirsat- FB Photo

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में आगामी चुनावों को लेकर गठबंधन के भविष्य पर बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के मंत्री संजय शिरसाट ने शनिवार को संकेत दिया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना 2029 का विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ सकते हैं। शिरसाट का यह बयान शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' के उस दावे के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि बीजेपी अब अकेले चलने की तैयारी कर रही है।

संजय शिरसाट ने ‘सामना’ के संपादकीय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर राजनीतिक दल को अपना संगठन मजबूत करने और चुनाव की तैयारी करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने साफ किया कि गठबंधन में होने का यह मतलब नहीं है कि पार्टियां भविष्य में अलग नहीं हो सकतीं। शिरसाट ने कहा कि अगर BJP 2029 का चुनाव अकेले लड़ने का फैसला करती है, तो वही विकल्प शिवसेना के पास भी रहेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अतीत में सीट बंटवारे को लेकर दोनों दल अलग हो चुके हैं और एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं।

'सामना' ने किया था दावा

उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के रुख को दर्शाने वाले 'सामना' ने दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर भविष्य के चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, यह तर्क देते हुए कि पार्टी का विस्तार उस बिंदु तक हो गया है जहां सहयोगियों को साथ लेकर चलना मुश्किल हो गया है। इसने सुझाव दिया कि बीजेपी की राजनीतिक रणनीति तेजी से स्वतंत्र रूप से शक्ति को मजबूत करने पर केंद्रित हो रही है। गठबंधन की वर्तमान स्थिति का कड़ा मूल्यांकन करते हुए, संपादकीय में आरोप लगाया गया कि बीजेपी सही समय आने पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की एनसीपी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना दोनों को किनारे करने की फिराक में है।

आपको बता दें कि सत्तारूढ़ गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए, संपादकीय ने स्थिति को "गिरती राजनीतिक संस्कृति" का सूचक बताया, जिसमें आरोप लगाया गया कि नेता शासन के बजाय राजनीतिक पुनर्गठन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि किसानों, विकलांग व्यक्तियों और विधवाओं से संबंधित प्रमुख मुद्दे अनसुलझे बने हुए हैं।