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महाराष्ट्र में BJP, शिवसेना और अजित पवार गुट में हुई ‘महायुति’, समझिए इसके पीछे का सियासी गणित

Maharashtra Mahayuti: एनसीपी नेता अजित पवार के जाने से एमवीए कमजोर हुई है। यानी शिवसेना और एनसीपी में फूट से बीजेपी को सीधा फायदा हो रहा है और उसका जनाधार बढ़ रहा है।

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Jul 03, 2023
BJP, शिवसेना और अजित पवार गुट में 'महायुति' हुई

Sharad Pawar Vs Ajit Pawar: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इससे महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया है। शिवसेना (शिंदे गुट), बीजेपी और अजित पवार गठबंधन को 'महायुति' नाम दिया गया है।

अजित पवार गुट के प्रवक्ता व एनसीपी एमएलसी अमोल मिटकारी (Amol Mitkari) ने कहा, “एनसीपी के 40 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद ही ये गठबंधन हुआ है। कुछ विधायक अभी तटस्थ भूमिका में हैं। शरद पवार एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं लेकिन हम अजित पवार के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते, उन्होंने 40 साल तक एनसीपी के लिए काम किया है।“

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एनसीपी में आर-पार की जंग शुरू

उधर, एनसीपी (शरद पवार) ने महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर के समक्ष एक याचिका दायर कर शिंदे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार और मंत्री पद की शपथ लेने वाले पार्टी के आठ अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की है। जबकि अजित पवार खेमे ने भी जयंत पाटिल और जितेंद्र अव्हाड को अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर नार्वेकर को आवेदन भेजा है।

एनसीपी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने रविवार को कहा था कि उनकी पार्टी ने अजित पवार तथा आठ अन्य के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की है।

5 जुलाई को साफ होगी तस्वीर

अजित पवार सहित एनसीपी के नौ विधायकों के महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने से स्पष्ट तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और बीजेपी की सरकार और मजबूत हुई मिली है। पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया जबकि छगन भुजबल सहित अन्य आठ विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली।

इसके एक दिन बाद आज अजित पवार ने शिवसेना और बीजेपी के साथ मिलकर महायुति गठबंधन का ऐलान किया है। जबकि अजित पवार गुट ने जयंत पाटिल की जगह सुनील तटकरे को महाराष्ट्र एनसीपी का प्रमुख नियुक्त किया है। तटकरे ने 5 जुलाई को एमईटी संस्थान में अपने सभी समर्थक विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। छगन भुजबल ने कहा कि पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अजित पवार के नेतृत्व का समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार हमारे गुरु है और वह ही एनसीपी के मुखिया रहेंगे।


बीजेपी को मिली एक्स्ट्रा ताकत!

यदि महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर सीएम शिंदे और 15 विधायकों को अयोग्य घोषित कर देते है, तो भी शिवसेना के बाकि विधायकों और एनसीपी नेता अजित पवार के प्रति निष्ठा रखने वाले विधायकों के समर्थन से बीजेपी सत्ता में बरकरार रहेगी। सूत्रों ने राजभवन को सौंपे गये एक पत्र के हवाले से बताया कि अजित पवार को एनसीपी के कम से कम 40 विधायकों का समर्थन है।

राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 105 विधायक, शिंदे नीत शिवसेना के 40 विधायक और एनसीपी के 53 विधायक हैं। दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों को लागू करने से रोकने के लिए अजित पवार को कम से कम 36 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

अगर अजित पवार गुट का दावा सही साबित हुआ तो बीजेपी के 105 और अजित पवार का समर्थन कर रहे एनसीपी के 40 विधायकों के साथ कुल संख्या बल 145 हो रही है। जबकि कम से कम 10 निर्दलीय विधायक भी बीजेपी के साथ हैं। इस तरह, बीजेपी शिंदे की शिवसेना के समर्थन के बगैर भी सरकार में बनी रह सकती है।

अजित दादा के जाने से MVA हुई कमजोर

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी द्वारा अजित पवार को साथ लेने का एक कारण यह भी है कि महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे गुट का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। एकनाथ शिंदे के साथ आने से बीजेपी को उतना फायदा नहीं हुआ है, जितना सोचा गया था। जबकि कई मोर्चों पर महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन ही शिंदे-बीजेपी गठबंधन पर भारी नजर आयी। हाल के एमएलसी व उपचुनाव के नतीजे भी इसी ओर इशारा करते है। लेकिन पिछले साल हुए पंचायत चुनाव में बीजेपी-शिंदे गुट विरोधियों पर भारी पड़ा है।

उधर, अजित पवार का महाराष्ट्र के कई इलाकों में गहरा प्रभाव है। बारामती और पुणे में अजित पवार की तगड़ी पकड़ है। अजित दादा को दौंड, इंदापुर, बारामती, पुरंदर, भोर, मावल, तालेगांव और पिंपरी-चिंचवड सहित कई सीटों पर मतदाताओं का भारी समर्थन प्राप्त है। यह समर्थन पूरे क्षेत्र में बाजार समितियों, दुग्ध संघों, सहकारी समितियों और ग्राम पंचायतों सहित कई स्थानीय निकायों में एनसीपी को ताकत देता है।

सीधे तौर पर कहे तो अजित पवार के जाने से एमवीए कमजोर हुई है। यानी शिवसेना और एनसीपी में फूट से बीजेपी को सीधा फायदा हो रहा है और उसका जनाधार बढ़ रहा है। हाल ही में आये एक चुनावी सर्वे में देखा गया है कि बिना एनसीपी और उद्धव गुट के कांग्रेस का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं हो सकता है। अजित पवार के विद्रोह का असर न केवल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बल्कि लोकसभा चुनाव के नतीजों पर भी पड़ने की संभावना है।

Updated on:
04 Jul 2023 06:44 am
Published on:
03 Jul 2023 10:47 pm
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