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BMC Election: मुंबई में वोट बैंक की राजनीति गरमाई, ‘मराठी मुस्लिम’ के बाद अब ‘उत्तर भारतीयों’ को रिझाने में जुटा उद्धव खेमा

मुंबई में अगले कुछ महीनों में बीएमसी इलेक्शन होने वाला हैं। मुंबई में 40 लाख से भी अधिक उत्तर भारतीय रहते हैं। मराठी मुसलमानों के बाद अब उद्धव खेमे का अगला निशाना उत्तर भारतीय ही हैं। उद्धव गुट लगातार उत्तर भारतीयों को रिझाने का काम कर रही है।

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Uddhav Thackeray at Dussehra Rally

जैसे-जैसे मुंबई में बीएमसी इलेक्शन नजदीक आ रहे हैं महाराष्ट्र की राजनीति में नए-नए वोट बैंक समाने आने लगे हैं। कुछ ही दिन पहले जहां उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना 'मराठी मुस्लिमों' को साधते हुए दिखाई दे रहे थे, तो अब एक और वोट बैंक निकल आया है। जिन उत्तर भारतीयों पर कभी शिवसेना के तेवर कड़े हुआ करते थे अब उन्हीं उत्तर भारतीयों को पार्टी रिझाने का काम कर रही हैं।

ऐसा लगता है कि अब उद्धव खेमे को अब उत्तर भारतीयों के साथ की आवश्यकता पड़ने लगी है। अब उद्धव खेमे का कहना है कि शिवसेना ने उत्तर भारतीयों को झोली भर-भरकर दिया ही है। उत्तर भारतीयों ने भी पिछले पांच दशकों से शिवसेना के साथ ही रहना पसंद किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह हैं बाबा साहेब ठाकरे का हिंदुत्व। उद्धव ठाकरे ने यह भी माना है कि उत्तर भारतीय समाज और शिवसेना के बीच दरार पैदा हुई थी। यह भी पढ़े: Maharashtra News: ब्रिटेन के PM ऋषि सुनक की सास सुधा मूर्ति ने छुए शंभाजी भिड़े के पैर, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

मुंबई में 40 लाख से ज्यादा उत्तर भारतीय: बता दें कि मुंबई में 40 लाख से भी अधिक उत्तर भारतीय रहते हैं। इस समय शिवसेना (उद्धव गुट) अपना बुरा दौर देख रही है। पार्टी में बगावत के सुरों के बाद विधायकों का साथ छूटने के बाद पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह दोनों ही जब्त हो गया। इसके बाद अब उन्होंने उत्तर भारतीयों का कार्ड खेला है। वहीं, अब बीजेपी ने इसपर जमकर हमला बोला है। बीजेपी का कहना है कि शिवसेना (उद्धव गुट) सत्ता से बाहर होते हुए भी उत्तर भारतीयों को परेशान करती थी और उनसे जबरन वसूली करती थी।

इसे उद्धव गुट के नए मास्टर स्ट्रोक के तौर पर आंका जा रहा है। गणित और राज्य में बदली हुई राजनीतिक को ध्यान में रखते हुए अब वोट बैंक भी बदलते नजर आ रहे हैं। प्रतिष्ठित बीएमसी के चुनाव में उद्धव सेना पिछले 25 सालों से कंट्रोल करती रही है। देखने वाली बात यह होगी की क्या इस बार मतदाता बदलती हुई इस उद्धव गुट को स्वीकार करेंगे या नहीं। खासकर जब बीजेपी इस पर कब्जा जमाने की हर प्रयास जारी है।