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मुंबई उच्च न्यायालय ने खारिज की सरकार की याचिका,अवैध निर्माण को वैध करने वाला कानून किया रद्द

अदालत ने साफ आदेश दिया है कि राज्य का कोई भी अवैध निर्माण नियमित नहीं किया जाएगा...

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(मुंबई): दिसंबर.2015 तक के अवैध निर्माण को वैध करने से जुड़े महाराष्ट्र सरकार के कानून को मुंबई हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे महाराष्ट्र सरकार को करारा झटका लगा है। अदालत ने साफ आदेश दिया है कि राज्य का कोई भी अवैध निर्माण नियमित नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब एमआईडीसी और सिडको क्षेत्र में बनाए गए अवैध निर्माणों को तोडऩे की कार्रवाई शुरू हो सकती है।


नवी मुंबई के दीघा में एमआईडीसी की जगह पर अवैध रूप से बिल्डिंग बनाई गई हैं। इन बिल्डिंगों में हजारो की संख्या में लोग रहते हैं। इन इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करने की याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। कुछ बिल्डिंग तोड़ी भी गई थीं। यहां रहने वाले लोगों ने राज्य सरकार से संरक्षण की गुहार लगाई थी।

सरकार ने की थी पहल

जिस तरह से दक्षिण मुंबई के वर्ली स्थित कैंपा कोला सोसायटी को नियमित किया गया, ठीक उसी तर्ज पर आम लोगों की बिल्डिंगों को नियमित करने के लिए सरकार ने पहल की। कैंपा कोला सोसायटी का हवाला देते हुए सरकार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका में 31 दिसंबर, 2015 तक के अवैध निर्माण को नियमति करने की मांग की गई।

अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं

मामले पर सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एमआरटीपी कानून 52 (अ ) में किए सुधार सही नहीं हैं, फिर भी हम इसे अवैध नहीं ठहरा रहे हैं। लेकिन जो निर्माण गलत है, उसे सरकार संरक्षण नहीं देगी। अदालत के इस निर्णय से राज्य भर के अवैध निर्माणों के साथ ही दीघा के सैकड़ों घरों पर पालिका और एमआईडीसी का हथौड़ा चलना अब तय माना जा रहा है।

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