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पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को बड़ी राहत, 840 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में CBI ने दी क्लीन चिट

Praful Patel Case Closed: प्रफुल्ल पटेल से जुड़े भ्रष्टाचार के इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही थी।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 28, 2024

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लोकसभा चुनाव से पहले एनसीपी (अजित पवार) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को बड़ी राहत मिली है। एयर इंडिया से जुड़े 840 करोड़ के कथित घोटाला मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पटेल को क्लीन चिट मिल गई है। भ्रष्टाचार के इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही थी।

मिली जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने अजित पवार गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ 2017 में दर्ज भ्रष्टाचार का मामला बंद कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मई 2017 में सीबीआई ने एयर इंडिया के लिए विमान लीज पर लेने में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और एयर इंडिया के अधिकारियों पर मामला दर्ज किया था। यह भी पढ़े-पहला पीरियड आने के बाद 14 साल की लड़की ने की आत्महत्या, मुंबई पुलिस ने किया चौंकाने वाला खुलासा

सूत्रों ने बताया कि करीब सात साल तक मामले की जांच करने के बाद सीबीआई ने प्रफुल्ल पटेल और MoCA और एयर इंडिया के तत्कालीन अधिकारियों को क्लीन चिट देकर अपनी जांच बंद कर दी है। साथ ही इसी साल 19 मार्च को कोर्ट के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की है।

15 फरवरी को उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने पटेल को राज्यसभा चुनाव के लिए नामित किया था। इसलिए विपक्षी दल लोकसभा चुनाव से पहले इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बना सकते हैं।

तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल पर एयर इंडिया के लिए बड़ी संख्या में विमान लीज पर लेने के लिए एमओसीए, एयर इंडिया और निजी कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर कथित भ्रष्टाचार की साजिश रचने और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था।

आरोप है कि एयर इंडिया के लिए विमान खरीद कार्यक्रम चल रहा था, फिर भी लीज पर विमान लिए गए। एयर इंडिया को 15 महंगे विमान लीज पर दिए गए थे, जिसके लिए पायलट तक उपलब्ध नहीं थे, जिससे कंपनी को भारी नुकसान हुआ।

सीबीआई की एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया कि एयर इंडिया ने निजी लोगों के फायदे के लिए 2006 में पांच साल की अवधि के लिए चार बोइंग 777 विमान कम रकम पर लीज पर दिए थे, जबकि एयर इंडिया को जुलाई 2007 से अपने खुद के विमान की डिलीवरी होनी थी। परिणामस्वरूप, 2007-09 के दौरान 840 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ और पांच बोइंग 777 और पांच बोइंग 737 बेकार खड़े रहे।