
15 वर्षीय रेप पीड़िता को नहीं मिली गर्भपात की इजाजत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
Chhatrapati Sambhaji Nagar: केंद्र सरकार ने औरंगाबाद जिले का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करने के प्रस्ताव को हाल ही में मंजूरी दे दी। औरंगाबाद के नए नाम को स्वीकृति मिलने के बाद से ही छत्रपति संभाजीनगर जिले में विरोध के शुर उठने लगे। इस बीच नाम परिवर्तन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इस पर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि जब तक नाम परिवर्तन के संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक सरकारी दस्तावेजों पर औरंगाबाद का नाम नही बदलें। शिंदे-फडणवीस सरकार ने पिछले साल 16 जुलाई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम क्रमशः छत्रपति संभाजीनगर और धाराशिव करने की मंजूरी दी। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र में तिरुपति टूर पर ले जाने के नाम पर 158 लोगों से ठगी, संभाजीनगर में केस दर्ज
राज्य सरकार ने औरंगाबाद और उस्मानाबाद जिलों का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने भी मंजूरी दे दी। लेकिन उसके बाद नाम बदलने का विरोध होने लगा। बाद में दोनों जिलों के नाम परिवर्तन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसमें याचिकाकर्ताओं ने कई तर्क देते हुए नाम बदलने के फैसले का विरोध किया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में छत्रपति संभाजीनगर नाम का खुलेआम पुलिस कमिश्नरेट, कोर्ट, राजस्व, पोस्ट ऑफिस जैसी जगहों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि औरंगाबाद का नाम सरकारी दस्तावेजों पर तब तक नहीं बदला जाना चाहिए जब तक नाम परिवर्तन पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता है। अगर ऐसा अभी किया जा रहा है तो इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। कोर्ट के इस आदेश का याचिकाकर्ताओं ने स्वागत किया है।
मालूम हो कि औरंगाबाद नाम मुगल बादशाह औरंगजेब के नाम पर रखा गया था। जबकि छत्रपति संभाजी भारतीय इतिहास में ध्रुवीकरण करने वाली हस्ती है जिनकी मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर हत्या कर दी गयी थी।
Published on:
24 Apr 2023 08:21 pm

बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
