
कंप्यूटर बाबा को भिवंडी में नो एंट्री,विवाद होने का डर
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
भिवंडी. सीएए और एनआरसी के खिलाफ आयोजित एक सभा में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को संविधान की मूल भावना और लोकतंत्र के खिलाफ है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा ने कही। उन्होंने कहा कि सरकार जाति-धर्म के आधार पर देशवासियों में बंटवारा कर रही है। वे यहां के दीवानशाह दरगाह के पास समरूबाग स्थित रशीद ताहिर कंपाउंड में सीएए और एनआरसी के विरोध में आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। इस सभा में मध्यप्रदेश के बहुचर्चित कंप्यूटर बाबा भी आने वाले थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें भी भिवंडी में आने और सभा करने की अनुमति नहीं दी थी।
बता दें कि पहले यह सभा दीवान शाह मैदान में होने वाली थी। लेकिन पुलिस की अनुमति न मिलने के कारण किसी सार्वजनिक स्थान के बदले चहारदीवारी से घिरी जगह में बिना माईक के करनी पड़ी।
बता दें कि महमूद पराचा ने इस अवसर पर भिवंडी वासियों को आगाह करते हुए कहा कि केंद्र सरकार संविधान के साथ मनमाना खिलवाड़ कर रही है। सीएए व एनआरसी को एक गंभीर खतरा बताते हुए उनका कहना था कि सरकार हिंदू-मुस्लिम सहित तमाम भारतीय समुदाय के लोगों के बीच जहर घोल रही है। क्योंकि केंद्र सरकार 125 करोड़ आबादी के लोगों को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने में पूरी तरह फेल है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पानी सहित तमाम अन्य बुनियादी सुविधाएं तो प्रदान करने में समर्थ नहीं है। तो नागरिकता संशोधन क़ानून से बढने वाली आबादी को कैसे नागरिक सुविधाएं मिलेगी? इस सभा के अन्य वक्ताओं ने भी केंद्र सरकार से सीएए व एनआरसी को रद्द करने की पुरजोर मांग की। इस मौके पर पूर्व विधायक रशीद ताहिर मोमिन, केएम सोहेल खान, मौलाना अहमद रजा अशरफी और नगरसेवक शकील पापा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
Updated on:
29 Dec 2019 05:54 pm
Published on:
29 Dec 2019 05:52 pm
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