
Covid-19: कोरोना की काट ढूंढ रहे एनआईवी वैज्ञानिक, आयुर्वेद से वैक्सीन बनाने में जुटीं कंपनियां
पुणे. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे के वैज्ञानिक एक तरफ कोविड-19 (Covid) की वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। दावा किया जा रहा कि कुछ परीक्षण अंतिम दौर में हैं। इसी के समानांतर आयुर्वेद के क्षेत्र में सक्रिय नामी कंपनियां भी कोरोना को मात देने के लिए वैक्सीन बनाने का प्रयास कर रही हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की निगरानी में आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़ीं कंपनियां काम कर रही हैं। आयुष मंत्रालय ने इसके लिए 3-डी प्लान तैयार किया है-जिसमें कोरोना की रोकथाम के साथ उपचार की दवाई पर रिसर्च को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कोरोना (Corona) की काट खोजने के लिए आयुष मंत्रालय ने हाल ही में आयुर्वेदिक क्षेत्र में रिसर्च को हरी झंडी दी है। इच्छुक कंपनियों और संस्थानों से मंत्रालय ने आवेदन भी मंगाए हैं। आयुर्वेद के जरिए कोविड-19 के उपचार का विकल्प जो संस्थान ढूंढ रहे हैं, उनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) भी शामिल है। बीएचयू के वैज्ञानिक डेंगू (Dengue) के इलाज में कारगर फीफाट्रोल पर शोध कर रहे हैं। यह पहला अवसर है जब कोरोना वायरस पर जड़ी बूटियों की ताकत का आंकलन किया जाएगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने इसका अनुमोदन किया है। केंद्र सरकार की फार्माकोपिया समिति के सदस्य रह चुके डॉ. केएन द्विवेदी का दावा है कि कोरोना वायरस पर आयुर्वेदिक औषधि का ट्रायल भारत में पहली बार होगा।
ये कंपनियां कर रहीं प्रयास
एनआईवी के अलावा देश की कई कंपनियां भी कोरोना की काट हासिल करने के लिए शोध कर रही हंैं। आधा दर्जन कंपनियां वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। इनमें भारत बायोटेक (Bharat Biotech), इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड, मायनवैक्स, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute), कैडिला आदि शामिल हैं।
Published on:
26 Apr 2020 12:26 am
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