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Maha Corona: पुलिस की सुरक्षा के लिए Bombay High court में याचिका, इसलिए हो रही चिंता…

पीपीई किट ( PPE Kit ) समेत पूरे वेतन ( Full Salary ) के साथ अलग भत्ते ( Separate Allowances ) की मांग की गई, खतरनाक परिस्थितियों ( Danger Circumstances ) में ओवरटाइम ( OverTime ) का भी रखा जाए ध्यान, लॉकडाउन ( LockDown ) को सख्ती से पालन कराने में जुटी पुलिस ( Mumbai Police )

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Bombay High Court

मुंबई. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और देश भर में लागू लॉकडाउन को सख्ती से पालन कराने के लिए फ्रंटलाइन में काम कर रहे पुलिस कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। वहीं उनकी सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें मेडिकल सेवाओं में लगे डॉक्टरों की तरह ही पुलिस वालों को भी पीपीई किट दिए जाने की जहां मांग की गई है, वहीं याचिका में उनके पूर्ण वेतन के साथ ही खतरनाक परिस्थितियों में ओवरटाइम काम के लिए एक अलग भत्ते की भी मांग की गई है।

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जल्द सुनवाई की उम्मीद...
राज्य सरकार की ओर से जारी एक हालिया आदेश के अनुसार, राज्य के प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के सरकारी अधिकारियों के वेतन में कटौती नहीं करनी चाहिए, ताकि वे मानसिक रूप से मजबूत रहें। पुणे के एक वकील तौसीफ शेख और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश गायकवाड़ ने अधिवक्ता गणेश गुप्ता की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है तो वहीं याचिका पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है।

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याचिका में कई सवाल...
लॉक डाउन के दरमियान दिन-रात हाई अलर्ट पर रही पुलिस फोर्स की स्थिति अब खराब हो गई है। नाकाबंदी, वायरस के संक्रमण इलाकों की जांच करना, कार्रवाई के तहत सोसायटियों को सील करने समेत होटलों और अस्पतालों के बाहर वीआईपी सेवा में जुटे पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का क्या? ऐसे सवाल जनहित याचिका में किए गए हैं।

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बढ़ रहा पुलिस अधिकारियों पर बोझ...
कोरोना वायरस से मुंबई पुलिस में भी डर का माहौल है। राज्य भर में पुलिस विभाग के 66 लोगों को कोरोना, 12 पुलिस अधिकारी व 54 कॉन्स्टेबल के अलावा मुंबई पुलिस के 35 जवान में कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस मिले हैं। इसमें वह पुलिस भी शामिल है, जो खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सरकारी आवास पर सुरक्षा के लिए तैनात थे। हालांकि पुलिस को ड्यूटी पर मास्क, दस्ताने और सैनिटाइज़र उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन अब यह स्पष्ट है कि ये चीजें पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए ड्यूटी पर पुलिस की कोरोनरी टेस्टिंग की जोरदार मांग है और उन्हें एक निश्चित अवधि के भीतर आयोजित किया जाना चाहिए। क्योंकि अगर कोई पुलिस कोरोना सकारात्मक हो जाता है, तो 10-15 पुलिसकर्मियों को क्वॉरेंटाइन में जाना पड़ता है, जिससे पुलिस अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ जाता है।

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पुलिसकर्मियों का मजबूत होगा मनोबल...
इसलिए ऐसी कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले पुलिसकर्मी को उनके पूरे वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए और अलग से भत्ता दिया जाना चाहिए। साथ ही मेडिकल सेवा में जुटे कर्मियों की तरह ही पुलिस को भी पीपीई किट मुहैया कराई जाए। इससे महामारी कोविद-19 की लड़ाई में फ्रंटलाइन पर लड़ रहे पुलिसवालों को जहां दिलासा मिलेगा, वहीं सुरक्षा को लेकर उनका मनोबल भी मजबूत होगा। ऐसी मांग बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में की गई है।

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