
दिल्ली जिमखाना क्लब की अंदर की तस्वीर (Photo: IANS)
लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने मंगलवार को क्लब से जुड़े सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार को समन जारी किया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में कोई बेदखली की कार्रवाई की जाती है, तो वह कानून के तहत पूर्व नोटिस देकर ही की जाएगी। इसके बाद अदालत ने कहा कि फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है।
सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक अपने पूरे 27.3 एकड़ परिसर को खाली कर जमीन केंद्र के हवाले करने का निर्देश दिया था। 22 मई को जारी इस आदेश के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा और इसके बंद होने की आशंका तेज हो गई।
सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना के स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने केंद्र के आदेश को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि इस फैसले का क्लब के संचालन और उसके हजारों सदस्यों पर बड़ा असर पड़ेगा। इसी मामले पर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद यह राहत मिली हैं।
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 1913 में हुई थी। यह क्लब सरकारी जमीन पर बनी है और वर्तमान में लीज पर है। इस पॉश क्लब के सदस्यों की संख्या 14,500 से अधिक है। इनमें प्रतिष्ठित सदस्य, कॉरपोरेट सदस्य, महिला सदस्य, डिप्लोमैट और अन्य श्रेणियों के सदस्य शामिल हैं। क्लब की कुल नेटवर्थ करीब 129 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
यह खबर अपडेट हो रही है।
Updated on:
26 May 2026 02:06 pm
Published on:
26 May 2026 01:21 pm
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