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ESIC अस्पतालों में दवाओं का संकट

सात-आठ महीनों से अस्पतालों की ओर से दवा के ऑर्डर ही नहीं दिए गए बिल के बाद भी उन्हें अभी तक नहीं मिला कोई रिफंड

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ESIC अस्पतालों में दवाओं का संकट

ESIC अस्पतालों में दवाओं का संकट

मुंबई. कामदार बीमा अस्पतालों (ईएसआईसी) में पिछले छह महीनों से दवाओं का भारी संकट है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि मरीजों को साधारण बुखार, खांसी और संक्रामक रोगों की दवाएं खरीदने के लिए भी बाहर भेजा जाने लगा है। सरकार ने 14 अस्पतालों को संगठित निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए चिकित्सकीय सेवा की व्यवस्था बनाई है। लेकिन दवाओं की कमी के कारण यह अपनी उपयोगिता पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले सात-आठ महीनों से अस्पतालों की ओर से दवा के ऑर्डर ही नहीं दिए गए हैं।


श्रमिक बीमा योजना से लाभ पाने वाले मरीजों ने दवाओं की अनुपलब्धता पर कई शिकायतें दर्ज कराई है। कैंसर, किडनी विकार, संक्रामक रोग, एंटीबायोटिक्स की भी कमी है। अस्पतालों की ओर से मरीजों को दवाओं के लिए सीधे बाहर भेजा जाता है, बाद में उनसे बिल जमा करवाया जाता है। मरीजों को खरीदने वाली दवाओं पर एमआरपी मूल्य निर्धारण पर छूट नहीं है। अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की कीमत और निजी तौर पर खरीदी जाने वाली दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर है। वहीं जिन मरीजों ने दवाओं के बिल दिए भी हैं, तीन से चार महीने के बिल के बाद भी उन्हें अभी तक कोई रिफंड नहीं मिला है।

अन्य विकल्पों से होगा इलाज
दवा की कमी का समाधान नहीं किया जाता है, तो अन्य विकल्पों के तहत मरीजों की हालत को देखते हुए रोगी को दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- डॉ. प्रदीप व्यास, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग