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गीले कचरे से बनेगी बिजली, रोशन होंगी आसपास की सड़कें-गार्डन

पहल: कचरा प्रबंधन देश के सभी शहरों के लिए चुनौतीहाजी में पहला प्लांट शुरू2 मेट्रिक टन गीले कचरे से पैदा होगी 300 यूनिट बिजली

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मुंबई. कचरा प्रबंधन छोटे-बड़े सभी शहरों के लिए बड़ी चुनौती है। खासकर गीले कचरे को ठिकाने लगाना आसान नहीं होता। आर्थिक राजधानी मुंबई में नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने वाली बीएमसी ने इस दिशा में अहम पहल की है। गीले कचरे से बिजली हासिल करने के लिए दक्षिण मुंबई के हाजी अली इलाके में एक छोटा प्लांट लगाया गया है। इसमें रोजाना दो मेट्रिक टन गीला कचरा प्रोसेस होगा। इस प्रक्रिया से 300 यूनिट बिजली हासिल होगी। कचरे से पैदा हुई बिजली हाजी अली इलाके की सड़कों-गार्डन को रात में रौशन करेगी। बीएमसी के आला अधिकारियों की मौजूदगी में महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन किया। आदित्य ने कहा कि इस पहले से पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाने में मदद मिलेगी। गीले कचरे की वजह से लोगों को दुर्गंध से निजात मिलेगी। गीले कचरे की समय पर प्रोसेसिंग से बीमारी के वाहक मच्छर-मक्खियां भी कंट्रोल में रहेंगे। सफलता मिली तो देश के बाकी शहरों के लिए यह रोल मॉडल बन सकता है।

प्लांट की लागत 75 लाख
बीएमसी के सहायक आयुक्त (डी वार्ड) प्रशांत गायकवाड ने बताया कि गीले कचरे से बिजली बनाने के लिए 75 लाख रुपए की लागत से प्लांट तैयार किया गया है। बायो-मिथेनेशन प्लांट में रोजाना दो मेट्रिक टन गीले कचरे की प्रोसेसिंग होगी। हमारे वार्ड में हर दिन औसतन इतना ही गीला कचरा जमा होता है। मतलब यह कि इस वार्ड में गीले कचरे का ढेर नहीं जमा होगा। गीले कचरे को डंपिंग ग्राउंड पहुंचाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

कैसे करेगा काम
बायो-मेथेनेशन प्लांट में कई चरणों में ऑर्गेनिक कचरे की प्रक्रिया की जाएगी। इससे प्लांट में बायोगैस जमा होगी। इसी गैस से बिजली तैयार होगी। कचरे की प्रोसेसिंग के लिए हर दिन 2000 लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी। बीएमसी ने इसका इंतजाम किया है।

अमीरों का बसेरा
बीएमसी का डी वार्ड अमीरों का बसेरा माना जाता है। हाजी अली, ताड़देव, गिरगांव, वाल्केश्वर, मालाबार हिल और अल्टामोंट रोड इसी वार्ड में आते हैं। महाराष्ट्र के मंत्रियों के बंगले, धन कुबेरों के घरौंदे इस क्षेत्र में हैं। केंद्र और राज्य सरकार के ज्यादातर आला अफसर भी इसी इलाके में रहते हैं।

रोजाना 8000 टन कचरा
मायानगरी में रोजाना 7000 से 8000 टन कचरा निकलता है। सूखा कचरा देवनार और कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड में भेजा जाता है। देवनार में सूखे कचरे से बिजली बनाने की योजना है। पहले चरण में हर दिन 600 मेट्रिक टन सूखा कचरा प्रोसेस करने के लिए 1100 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है। अभी इस पर काम नहीं शुरू हुआ है।