
एलफिंस्टन रोड हादसा : आज भी दिल को दहला देती हैं वे सिसकियां
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई . 29 सितम्बर, 2017 एलफिंस्टन रोड हादसा। आज ही के दिन मुंबई को ऐसे जख्म मिले, जो अब तक टीस मारते रहते हैं । हादसे में 22 लोगों की असमय जान चली गई थी। रेलवे फुट ओवर ब्रिज के यकायक ढह जाने से न जाने कितनों घर में मातम पसर गया। एलफिंस्टन रोड (अब प्रभादेवी) स्टेशन पर हुए उस दर्दनाक हादसे को दो साल बीत गए। इस हादसे के बाद भी कई हादसे होते रहे और सरकारी स्तर पर उनको रोकने के लिए ढेरों प्रयास भी हुए, पर कुछ नहीं रुक पाया तो वह था मौतों के होने का सिलसिला। कभी रेलवे पुल हादसे का कारण बन गया तो कभी जर्जर दीवारें और मकान। लेकिन एलफिंस्टन रोड स्टेशन पर गिरा पुल अकेला जर्जर पुल नहीं था।
आज भी मुंबई में ज्यादातर फुटओवर ब्रिज पुराने और जर्जर हैं । इनसे रोज हजारों लोग गुजरते हैं। बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या ऐसे पुल लोगों का वजन उठाने में सक्षम हैं? क्योंकि हादसों के बाद ही तमाम तरह के कारणों को ढूंढने का शोर मचता है । बाकी न तो सरकार पर इसका असर दिखता है, न ही स्थानीय प्रशासन पर। हादसा हो जाने के बाद मुआवजे की बातें, पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और भविष्य में हादसे रोकने की कागजी योजनाओं के ज्यादा कुछ नहीं होता।
दरअसल, मुंबई में बारिश के मौसम में कई हादसे होते हैं, ऐसी धारणाएं बन गई हैं। वह इसलिए कि बारिश से पहले पुरानी इमारतों को मोटे नीले प्लास्टिक से ढक दिया जाता है। बीएमसी कहने को तो कई ठोस कदम उठाती है, पर पुराने पुलों को लेकर योजनाएं कागजों और सरकारी फाइलों में अटक कर रह जाती हैं । अंधेरी में गोखले ब्रिज हादसे के बाद कहा गया था कि मुंबई के 445 ओवरब्रिज का निरीक्षण किया जा रहा है, जिनमें से 6 को बंद करके फिर से बनाया जाएगा।
ये ओवरब्रिज थे – मलाड फुटओवर ब्रिज, तिलकनगर फुटओवर ब्रिज, गोखले ब्रिज, घाटकोपर, कलानगर और वसई ओवरब्रिज। लेकिन इनमें छत्रपति शिवाजी टर्मिनल यानी सीएसटी का नाम नहीं था। इसी पुल से अजमल कसाब जैसा आतंकी गोलियां बरसाता हुआ गुजरा था।
बनाएं ठोस योजना, हर एक जान बचाना अहम
स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे लोगों की जिन्दगी को बचाने के लिए ठोस योजनाएं बनाएं । उन्हें फाइलों में दफन करने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करें। तभी ऐसे हादसों से बचा जा सकेगा, क्योंकि फिलहाल तो तंत्र के पास इन हादसों से बचने की कोई ठोस योजना नहीं है। मुंबई की जर्जर इमारतों या पुलों को लेकर कोई जमीनी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। अब चुनाव का वक्त है और सभी सियासी पार्टियां वोट बैंक के रास्ते तलाश रही हैं। पर, सबसे ज्यादा जरुरी है कि एक भी मुंबईकर की जान नहीं जाए।
Published on:
29 Sept 2019 06:00 am
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