
Election News : भाजपा-शिवसेना साथ तो आ गए, करेंगे क्या, नहीं बताया?
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सोमवार शाम भारतीय जनता पार्टी-शिवसेना की महायुति पर मुहर लग गई। लेकिन, सीट बंटवारे का पेंच अभी तक सुलझा नहीं है। भाजपा और शिवसेना के बीच कुछ सीटों को लेकर बातचीत जारी है। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार तक यह मामला सुलझ जाएगा। सत्ताधारी भाजपा नीत महायुति में शिवसेना के अलावा रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआइ), आरएसपी, शिवसंग्राम और रैयत क्रांति पार्टी शामिल हैं। महायुति में शामिल सभी दलों की ओर से जारी संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई है। इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील और शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई के हस्ताक्षर हैं।
भाजपा आलाकमान के साथ दिल्ली में चर्चा के बाद मुंबई लौटे पाटील, शिवसेना नेता देसाई के साथ पत्रकारों के साथ मुखातिब हुए। दोनों ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे, आरपीआइ नेता रामदास आठवले, आरएसपी के महादेव जानकर, शिवसंग्राम के विनायक मेटे और रैयत क्रांति पार्टी के सदाभाऊ खोत के बीच हुई चर्चा के बाद महायुति पर सहमति बन गई। हालांकि पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा-शिवसेना को छोड़ बाकी दलों के नेताओं की गैर-हाजिरी बहुतों को खली।
सीटों का बंटवारा जल्द
महायुति में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे से जुड़े सवाल का सीधा जवाब न तो पाटील ने दिया और न ही देसाई कुछ बोले। दोनों ने कहा कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, इसकी घोषणा जल्दी की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा की 146 सीटों पर भाजपा लड़ेगी जबकि शिवसेना 124 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। सहयोगी दलों को 18 सीटें दी जाएंगी। मिली जानकारी अनुसार शिवसेना इस पर सहमत नहीं है, जो कुछ और सीटें मांग रही है। वहीं, भाजपा ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना चुकी है।
आदित्य ठाकरे भी उतरे चुनाव मैदान में
भाजपा और शिवसेना के गठबंधन, सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा भले ही नहीं हुई हो, पर शिवसेना ने पहली बार ठाकरे परिवार के सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने का मन बना लिया है। जुलाई में भाजपा से इतर शिवसेना की जन आशीर्वाद यात्रा की कमान संभालने युवा नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र की जनता के बीच जाकर यह संदेश देने का काम किया कि शिवसेना के आने वाले कल की इबारत वे लिखेंगे। वहीं, पार्टी ने भी भाजपा के साथ मतदाताओं के बीच यह बात पहुंचाने की कोशिश की कि दुबारा सत्ता में लौटने पर आदित्य उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। यही कारण रहा कि आदित्य को सबसे सुरक्षित मुंबई की वर्ली सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया गया है ।
Published on:
30 Sept 2019 10:29 pm
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